गोल्ड मेडल जीतकर लौटीं संजू देवी, एयरपोर्ट पर सन्नाटा देख सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
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एशियन गेम्स में देश का मान बढ़ाने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की खिलाड़ी संजू देवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब संजू देवी स्वदेश लौटीं, तो एयरपोर्ट पर उन्हें लेने वाला कोई बड़ा काफिला नहीं दिखा।

एयरपोर्ट पर अकेले सामान ढोती दिखीं विजेता सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में संजू देवी को भारतीय टीम की आधिकारिक जर्सी में देखा जा सकता है। उनके गले में गोल्ड मेडल है, लेकिन एयरपोर्ट के बाहर वह खुद अपनी ट्रॉली खींचती हुई नजर आ रही हैं। इस सादगी भरे दृश्य ने देश में खेलों के प्रति हमारे नजरिए पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्रिकेट बनाम अन्य खेल: क्या भेदभाव हो रहा है? वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। लोगों का कहना है कि भारत में जब क्रिकेट खिलाड़ी लौटते हैं, तो एयरपोर्ट पर ढोल-नगाड़ों और प्रशंसकों का सैलाब होता है। वहीं, कबड्डी, कुश्ती और अन्य खेलों में देश के लिए जान झोंकने वाले खिलाड़ियों की वापसी इतनी खामोश क्यों होती है? यूजर्स का तर्क है कि देश का गौरव बढ़ाने वाले हर एथलीट को समान सम्मान मिलना चाहिए।

छत्तीसगढ़ की बेटी का संघर्ष संजू देवी का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। छत्तीसगढ़ के कोरबा जैसे छोटे क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना कोई मामूली बात नहीं है। इस उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें सम्मानित करते हुए 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है, जो निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है।

स्वागत में क्यों नहीं उमड़ा जनसैलाब? हालांकि, सरकारी सम्मान के बावजूद एयरपोर्ट का वह भावुक कर देने वाला वीडियो एक कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करता है। क्या किसी खिलाड़ी का सम्मान केवल सरकारी चेक और पुरस्कार तक सीमित है? प्रशंसक मांग कर रहे हैं कि हमारे एथलीटों को वह भव्य स्वागत मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं, चाहे खेल कोई भी हो।

सिर्फ क्रिकेट से ऊपर देखने की जरूरत यह पहली बार नहीं है जब एशियन गेम्स या ओलंपिक के बाद खिलाड़ियों के स्वागत को लेकर ऐसी खबरें आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए केवल पुरस्कार राशि ही काफी नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उन खेलों की पहचान और खिलाड़ियों को सम्मान मिलना चाहिए जो ओलंपिक और एशियन गेम्स में भारत का झंडा बुलंद करते हैं।

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