# ठाकरे ब्रदर्स की अनोखी मुहिम: पार्टी झंडे का त्याग, सिर्फ तिरंगे के साथ सड़कों पर उतरे उद्धव-राज
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महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने वैचारिक मतभेदों को किनारे रखकर एक साझा विरोध प्रदर्शन किया। सबसे खास बात यह रही कि इस रैली में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा या चुनाव चिह्न नहीं दिखा, बल्कि कार्यकर्ताओं के हाथों में केवल तिरंगा था।

सीईसी के इस्तीफे की मांग यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया। बायकुला से CSMT स्थित BMC मुख्यालय तक निकली इस रैली का मुख्य एजेंडा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना था। विपक्ष का आरोप है कि हालिया मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के जरिए करोड़ों मतदाताओं को हटाने का खेल खेला जा रहा है, जिसे वे वोट चोरी करार दे रहे हैं।

दीपके मॉडल पर ठाकरे ब्रदर्स ठाकरे ब्रदर्स का यह तिरंगा-ओनली मॉडल अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से प्रेरित नजर आता है। राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करना है। इसीलिए, उन्होंने भाजपा सहित किसी भी दल को इस मंच पर आने का खुला न्योता दिया था।

शरद पवार का मिला साथ ठाकरे ब्रदर्स की इस मुहिम को शरद पवार की एनसीपी (SP) ने भी समर्थन दिया है। कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी पार्टी इस संयुक्त विरोध में साथ है। उद्धव ठाकरे ने भी जोर देते हुए कहा कि अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, लेकिन देश के लोकतंत्र को बचाने का एजेंडा एक ही है।

आयोग से पुराना है उद्धव का झगड़ा उद्धव ठाकरे के लिए चुनाव आयोग के साथ यह लड़ाई राजनीतिक से ज्यादा भावनात्मक है। जून 2022 में शिवसेना के विभाजन और फरवरी 2023 में आयोग द्वारा एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चिह्न आवंटित करने के बाद से ही उद्धव ठाकरे की नाराजगी जगजाहिर है।

क्या है मतदाता सूची का विवाद? आयोग पर यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने को लेकर रिपोर्ट सामने आई है। लाखों मतदाताओं को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे गए हैं। विपक्ष इसे एक सोची-समझी साजिश बता रहा है, जबकि ठाकरे ब्रदर्स ने अब इसके खिलाफ तिरंगा आंदोलन छेड़ दिया है।

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