दहलीज पर खड़ा युद्ध मिडिल-ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है। हालिया घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुली चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी ताकतें उनके देश को निशाना बनाने की साजिश रच रही हैं, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। मोसाद और सीआईए जैसी खुफिया एजेंसियां अब इस मामले में सबूत जुटाने में लगी हैं।
नेतन्याहू का कड़ा रुख सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए नेतन्याहू ने दो टूक कहा, जिसने भी इस पायलट को भेजा है, उसे भारी परिणाम भुगतने होंगे। अगर इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की जांच में ईरान का नाम सामने आता है, तो इजरायल की ओर से जवाबी बमबारी तय मानी जा रही है। इजरायल के साथ इस जांच में अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई और ओमान भी शामिल हैं।
अमेरिका का बड़ा बिल्डअप युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। सऊदी अरब और कतर में अत्याधुनिक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 9,000 अमेरिकी सैनिक मिडिल-ईस्ट भेजे जा रहे हैं, जबकि पहले से ही वहां करीब 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जानकारों का मानना है कि नवंबर की शुरुआत में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
समुद्र में घेराबंदी ईरान को घेरने के लिए अमेरिका ने अपनी नौसैनिक ताकत झोंक दी है। यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट का बेड़ा ईरान की ओर रवाना हो चुका है, जबकि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन और यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में तैनात हैं। ये जंगी बेड़े युद्ध के लिए स्ट्राइकिंग पोजीशन पर पहुंचने की तैयारी में हैं।
ईरान ने भी भरी हुंकार ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह युद्ध और बातचीत, दोनों के लिए तैयार है। हाल ही में ईरान ने दुश्मन के फाइटर जेट्स को हवा में मार गिराने वाली मिसाइलों का परीक्षण किया है। ईरान का दावा है कि अगर पिछले युद्ध की तरह इजरायली-अमेरिकी विमान उनके हवाई क्षेत्र में घुसते हैं, तो वे उन्हें करारा जवाब देने में सक्षम हैं।
क्या है असली वजह? मामले की जड़ में एक संदिग्ध घटना है, जहां फ्लाईदुबई (FlyDubai) की फ्लाइट के कॉकपिट में कैप्टन पर हमले की खबरें सामने आई हैं। इस मामले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और खुफिया सतर्कता बढ़ा दी गई है। अब पूरी दुनिया की निगाहें मोसाद की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि मध्य-पूर्व में शांति बनी रहेगी या महायुद्ध का आगाज होगा।
מי ששלח את הטייס הזה ישלם מחיר כבד מאוד pic.twitter.com/C4sDXRuR2r
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) October 2, 2026
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