सूरत के डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग कारखानों में इन दिनों एक अजीब सी हलचल है। कुछ महीने पहले तक जहां मंदी और छंटनी का दौर था, वहां अब मशीनें 24 घंटे गरज रही हैं। कारीगर अपनी सामान्य शिफ्ट से कहीं ज्यादा समय फैक्ट्रियों में बिता रहे हैं। कई जगह काम 12 से 18 घंटे तक खिंच गया है।
कारीगरों की तलाश में जूझ रहे मालिक कारखानों के बाहर अब नए कारीगरों की भर्ती के बोर्ड लगे हैं, लेकिन कुशल कामगार मिलना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। कारखानेदारों का कहना है कि मशीनों की संख्या तो बढ़ाई जा सकती है, लेकिन प्रशिक्षित कारीगर रातोंरात तैयार नहीं होते। इसी वजह से मौजूदा स्टाफ पर काम का भारी दबाव है।
अमेरिका का टैरिफ डर बना वजह इस अचानक बढ़ी मांग के पीछे कोई त्योहार या सीजन नहीं, बल्कि अमेरिका की सख्त नीति है। अमेरिका ने 18 सितंबर को एक कानून पारित किया है, जिसके तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों के सामानों पर 100% तक अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है। यह कानून 18 अक्टूबर से प्रभावी होने की आशंका है।
अभी निकालो, बाद का बाद में देखेंगे भारतीय हीरा व्यापारियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। कारोबारी किसी भी जोखिम से बचने के लिए ऑर्डर अभी निकालो की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि 18 अक्टूबर की डेडलाइन से पहले अधिक से अधिक माल अमेरिका पहुंच जाए, ताकि संभावित भारी-भरकम टैक्स से बचा जा सके।
जियो-पॉलिटिक्स का सूरत कनेक्शन यह स्थिति अमेरिका और रूस के बीच जारी जियो-पॉलिटिकल तनाव का सीधा असर है। हालांकि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू होगा ही, यह निश्चित नहीं है, लेकिन भारतीय निर्यातक इसे लेकर कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहते।
मौजूदा तेजी कोई स्थायी सुधार नहीं, बल्कि एक टैरिफ घड़ी के खिलाफ दौड़ है। व्यापारियों की नजरें 18 अक्टूबर पर टिकी हैं। अगर उस तारीख के बाद अमेरिका कोई कड़ा फैसला लेता है, तो अगली खेप और भारतीय एक्सपोर्ट पर इसका सीधा असर पड़ना तय है। फिलहाल, यही डर सूरत के हीरा कारखानों में दिन-रात की भागदौड़ का मुख्य कारण बना हुआ है।
#AwaazStory | हीरा कारखानों में तेजी से हो रहा काम
— CNBC-AWAAZ (@CNBC_Awaaz) September 30, 2026
टैरिफ के डर से ऑर्डर पूरा करने की जल्दी
रूस से तेल खरीद पर ट्रंप टैरिफ की आशंका
अमेरिका से मिले ऑर्डर निपटाने में जुटे कारोबारी
देखिये ये रिपोर्ट ..
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