दिल्ली में हुई अहम बैठक से अखिलेश यादव का नदारद रहना विपक्ष के लिए चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने न केवल खुद दूरी बनाई, बल्कि पार्टी के किसी बड़े कद के नेता को भी नहीं भेजा। आइए जानते हैं आखिर इसके पीछे की असली वजह क्या है।
नाराजगी का कड़ा संदेश सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव कांग्रेस के हालिया रुख से काफी खफा हैं। उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयानों ने सपा अध्यक्ष को नाराज कर दिया है। इसे सपा खेमे में कांग्रेस द्वारा दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका जवाब अखिलेश ने बैठक से अनुपस्थित रहकर दिया है।
रणनीति के तहत बनाई दूरी अखिलेश यादव का योजनाबद्ध तरीके से बैठक से बाहर रहना महज इत्तेफाक नहीं है। 29 सितंबर को रामगोपाल यादव का नामांकन था। अखिलेश चाहते तो अपने सभी उम्मीदवारों का नामांकन एक साथ कर सकते थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर सिर्फ रामगोपाल यादव का नामांकन तय किया, ताकि पार्टी के पास दिल्ली की बैठक में न जाने का एक पुख्ता बहाना रहे।
प्रतिनिधियों का चुनाव भी सोची-समझी चाल सपा ने बैठक में अपने शीर्ष नेताओं के बजाय मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक और रामपुर के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को भेजा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव संदेश देने के लिए था—पार्टी की उपस्थिति तो दर्ज रही, लेकिन कोई बड़ा नेता कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार की ठोस प्रतिबद्धता में नहीं बंधा।
सीट शेयरिंग: असली कलह की जड़ असली विवाद 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर है। कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग पर अड़ी है, जबकि समाजवादी पार्टी का साफ कहना है कि सीटें विनेबिलिटी (जीतने की क्षमता) के आधार पर मिलनी चाहिए। अखिलेश ने कांग्रेस से दो टूक कह दिया है कि पहले वे अपने उम्मीदवारों के नाम बताएं, फिर सपा सीटों पर फैसला लेगी।
विपक्ष की एकता पर सवाल? भले ही पार्टी प्रतिनिधियों ने साफ किया है कि वे भाजपा के खिलाफ लड़ाई में साथ हैं, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दे दिया है कि गठबंधन का मतलब कांग्रेस की हर शर्त को मानना नहीं है। इससे पहले भी सपा नेता आईपी सिंह कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर तंज कस चुके हैं।
अखिलेश का पावर गेम इस पूरे घटनाक्रम से अखिलेश यादव यह जताना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन की धुरी समाजवादी पार्टी ही है। बैठक से दूरी बनाकर उन्होंने एक साथ दो काम किए हैं—अपनी नाराजगी भी ज़ाहिर की है और सीट बंटवारे की सौदेबाजी में अपनी स्थिति को भी मजबूत किया है। अब गेंद कांग्रेस के पाले में है कि वह इसे किस तरह लेती है।
*#WATCH | Delhi | On the INDIA alliance meeting, Samajwadi Party MP Harendra Singh Malik says, Samajwadi Party will participate in the meeting... Either the Chief will attend himself or will send the General Secretary... We are fighting the PDA s battle against the BJP and in… pic.twitter.com/GIwtPYCibB
— ANI (@ANI) September 29, 2026
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