हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका का सुरक्षा कवच : दिल्ली में हुई अहम सैन्य बैठक
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नई दिल्ली: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका ने अपने रक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करने का संकल्प लिया है। इस दिशा में सोमवार को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने भविष्य की रणनीतियों पर मंथन किया।

जनरल सेठी और अमेरिकी जनरल वोवेल की विशेष मुलाकात

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और अमेरिकी सेना प्रशांत (USARPAC) के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी वोवेल के बीच यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों सैन्य अधिकारियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान भविष्य में रक्षा सहयोग के नए अवसरों को तलाशने पर सहमति बनी।

इंटरऑपरेबिलिटी पर खास जोर

मुलाकात का मुख्य केंद्र दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता) बढ़ाना रहा। भारतीय थलसेना ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यासों के जरिए तालमेल को और बेहतर बनाया जाएगा। हाल ही में संपन्न युद्ध अभ्यास 2026 ने साबित किया है कि दोनों देश जटिल सैन्य अभियानों में एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

रक्षा तकनीक और औद्योगिक साझेदारी की नई राह

सैन्य कमान स्तर की बातचीत के साथ ही रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य रक्षा औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था। दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बदलते आयामों पर जोर दिया, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा तकनीक का साझा विकास प्राथमिकता में है।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में दिखा दम-खम

पिछले सप्ताह राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका के सैनिकों ने संयुक्त अभ्यास किया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने खुद इस अभ्यास का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि दोनों सेनाओं को एक साथ प्रशिक्षण करते देखना यह दर्शाता है कि भारत-अमेरिका की सैन्य दोस्ती अब भरोसे और साझा उद्देश्यों के एक नए मुकाम पर पहुंच गई है।

क्यों अहम है यह कदम?

चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका का यह तालमेल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। संयुक्त अभ्यास और तकनीकी साझाकरण न केवल दोनों देशों की सैन्य दक्षता बढ़ा रहे हैं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक मजबूत संदेश भी दे रहे हैं।

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