उत्तर प्रदेश की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद अब अपनी राजनीतिक पारी का बड़ा ऐलान कर दिया है। 13 साल के सेवाकाल के बाद वे व्यवस्था का हिस्सा बनने के बजाय अब जनता की आवाज बनने की राह पर चल पड़ी हैं।
सरकारी सिस्टम से मोहभंग या नई शुरुआत? दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि राजनीति में आने का उनका फैसला अचानक नहीं है। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने शिक्षा, बदहाल सड़कें, भ्रष्टाचार और न्याय में देरी जैसी कई खामियां देखीं। उन्होंने बताया कि नियम और संसाधन होने के बावजूद काम जमीन पर नहीं उतर पाता, क्योंकि इरादों की कमी होती है। अब वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों में अनसुनी कर दी जाती है।
अधूरे स्कूल और न्याय के मुद्दे पूर्व आईएएस ने अपने कार्यकाल के कुछ किस्से साझा किए। उन्होंने लहुरियादह की पहाड़ियों पर एक स्कूल का जिक्र किया, जिसे मंजूरी मिलने के बाद भी तीन साल तक नहीं बनाया गया। इसी तरह, सरकारी भूमि का पट्टा मिलने के बाद भी कब्जा न मिलने के मामलों पर उन्होंने सवाल उठाए। दिव्या का कहना है कि वे जानना चाहती हैं कि संविधान के ऊपर ये अदृश्य रोक कौन लगाता है।
किसी दल के साथ नहीं, अपना मंच बनाएंगी दिव्या मित्तल किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय आम लोगों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र मंच बनाने की बात कर रही हैं। उनका लक्ष्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीति में संवेदनशीलता और दूरदर्शिता लाना है। उन्होंने युवाओं से जुड़ने के लिए एक वॉट्सऐप नंबर (9198956957) भी जारी किया है, ताकि लोग सीधे अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
राजभर का तंज, बोले— विधायक बनना आसान नहीं दिव्या के इस कदम पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने कहा, आईएएस बनना आसान है, लेकिन चुनाव लड़ना और विधायक बनना बहुत मुश्किल है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिव्या के पास शायद पैसा बहुत है, इसलिए वह राजनीति में आ रही हैं। वहीं, राजभर ने इंडिया गठबंधन को भी निशाने पर लेते हुए उन्हें दगे हुए कारतूस बताया।
आईएएस से अब जनसेवक बनने का सफर दिव्या मित्तल का करियर हमेशा से चर्चा में रहा है। लंदन में जेपी मॉर्गन जैसी बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में आईं दिव्या ने मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया जैसे जिलों में अपनी एक सख्त और संवेदनशील अधिकारी की छवि बनाई। अब जबकि उन्होंने प्रशासनिक सेवा को जीवन का सिर्फ एक चैप्टर बताया है, देखना यह होगा कि उत्तर प्रदेश की जटिल राजनीति में वे अपने इस नए स्वतंत्र मंच के जरिए कितनी बड़ी चुनौती पेश कर पाती हैं।
*कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए। pic.twitter.com/mtS6gzBzRw
— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) September 29, 2026
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