आईएएस दिव्या मित्तल ने छोड़ी नौकरी, अब हिसाब मांगने के लिए राजनीति में रखेंगी कदम
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आईएएस अधिकारी के पद से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक 9 मिनट का वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने कहा कि वह सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव और जवाबदेही तय करने के लिए राजनीति में आ रही हैं।

मुझे 80 साल का हिसाब चाहिए दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने नौकरी इसलिए छोड़ी क्योंकि अब उन्हें काम करना है। उन्होंने सवाल किया कि देश की आजादी के 80 साल बाद भी आम आदमी अपनी समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर क्यों काट रहा है? उन्होंने कहा कि वह उन स्कूलों, अधूरी सड़कों और न्याय की फाइलों का हिसाब मांगने आई हैं, जो केवल फाइलों में दबे रह गए।

इरादे की कमी ही सबसे बड़ी बाधा दिव्या ने एक भावुक वाकया साझा करते हुए बताया कि कैसे तीन साल पहले स्वीकृत होने के बावजूद एक स्कूल नहीं बन पाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या पैसों या नियमों की नहीं, बल्कि इरादे की है। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्हें कई बार ऊपर (उच्चाधिकारियों) से दबाव के चलते काम रोकने का आदेश मिला, जिससे उन्होंने महसूस किया कि अब बदलाव के लिए सिस्टम के बाहर से लड़ना जरूरी है।

किसी दल के साथ नहीं, जनता के साथ पूर्व आईएएस ने साफ किया कि वह किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे नहीं आएंगी। उन्होंने कहा, जो झंडे 80 सालों में हिसाब नहीं बदल पाए, उनके नीचे खड़े होकर हिसाब नहीं माँगा जा सकता। उन्होंने घोषणा की कि वह उत्तर प्रदेश की धरती से अपनी राजनीति शुरू करेंगी और लोगों को जोड़कर एक नया मंच बनाएंगी।

मुझ पर नहीं, खुद पर भरोसा करें राजनीति में आने पर मिल रही चुनौतियों और ट्रोलिंग का जिक्र करते हुए दिव्या ने कहा कि उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने आम लोगों, शिक्षकों, किसानों और युवाओं से आह्वान किया कि वे उनके साथ जुड़ें। उन्होंने अपने व्हाट्सएप नंबर (9198956957) के जरिए लोगों से संपर्क करने की अपील की है।

दिव्या मित्तल का लक्ष्य केवल राजनेता बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के मायने बदलना है। उनका कहना है कि आने वाले समय में एक ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां आम आदमी को अपने हक के लिए सिफारिश न लगानी पड़े और न्याय उसका अधिकार हो।

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