चुनाव आयोग बनाम कांग्रेस: मल्लिकार्जुन खरगे ने CEC के इस्तीफे की मांग की, मैच-फिक्सिंग का आरोप
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) विवाद के बीच खरगे ने उन पर बीजेपी की विचारधारा को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और CEC को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

CWC की आपात बैठक बुलाई खरगे ने जानकारी दी कि इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा, यह मुद्दा केवल चुनावी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र के अस्तित्व से जुड़ा है। बैठक में समिति के सभी सदस्य अपने सुझाव देंगे और हम इस लड़ाई को पूरी गंभीरता से लड़ेंगे।

बीजेपी के कार्यकर्ता बन गए हैं CEC खरगे ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के दावों का हवाला देते हुए कहा कि CEC ने खुद उन्हें बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था। खरगे ने तल्ख लहजे में कहा, सर्वाधिक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति यदि बीजेपी का कार्यकर्ता बनकर काम करेगा, तो यह स्पष्ट है। उनमें यदि थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

राहुल गांधी का मैच-फिक्सिंग वाला बयान इससे पहले राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को मैच-फिक्सिंग करार दिया था। उन्होंने केरल के एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए CEC की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। वहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि विवादित पत्र केवल प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि किसी नीतिगत मामले से।

आंतरिक असहमति का साया विवाद की जड़ में केवल राजनीतिक बयानबाजी ही नहीं, बल्कि आयोग का आंतरिक कामकाज भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इसमें नाम हटाने और डेटाबेस तक पहुंच जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल थे।

राजनीतिक घमासान जारी कांग्रेस के इन आरोपों पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि नाच न जाने आंगन टेढ़ा वाली स्थिति है और राहुल गांधी को अपने आरोपों के लिए माफी मांगनी चाहिए। वहीं, अन्य भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि विपक्ष अपनी हार की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

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