झूठ को 100 बार दोहराने से वह सच नहीं बनता : चुनाव आयोग विवाद पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर तीखा हमला
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चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर जारी सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं पर संवैधानिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया।

विपक्ष फैला रहा है अराजकता जेपी नड्डा ने कहा कि आज जब भारत 140 करोड़ नागरिकों के संकल्प के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ा है, तो विपक्षी दल इससे हताश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन के पास न तो कोई स्पष्ट विजन है और न ही कोई नीति। बस देश में भ्रम और अव्यवस्था का माहौल बनाना ही उनका एकमात्र एजेंडा रह गया है।

राहुल गांधी को नड्डा की सीधी नसीहत विपक्ष के हमलों पर पलटवार करते हुए नड्डा ने खास तौर पर राहुल गांधी का नाम लिया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, राहुल गांधी, ध्यान से सुनिए, झूठ को 100 बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता। सच को कभी हराया नहीं जा सकता। उन्होंने केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे नेताओं पर भी संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने की राजनीति करने का आरोप लगाया।

ECI ने स्पष्ट की अपनी स्थिति हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों एसएस संधू और विवेक जोशी द्वारा SIR (Systemic Improvement Reforms) से जुड़े कुछ फैसलों पर असहमति जताने की बात सामने आई थी, जिसके बाद विपक्ष ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इस पर नड्डा ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने जोर दिया कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

विकास बनाम सत्ता की राजनीति नड्डा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इनका एकमात्र लक्ष्य केवल सत्ता हथियाना है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष पहले झूठ फैलाता है, देश में भ्रम की स्थिति पैदा करता है और जब पोल खुलती है तो अपने आरोपों से पीछे हट जाता है। भाजपा अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि देश की जनता इन प्रयासों को बखूबी समझती है और समय आने पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने वालों को करारा जवाब देगी।

पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है कि अब आयोग की बैठकों का एजेंडा और उनका ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा। यह कदम संस्था की पारदर्शिता को और अधिक स्पष्ट करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या राजनीतिक दुष्प्रचार के लिए जगह न बचे।

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