होर्मुज में गेम ओवर : अमेरिकी सेना ने Xbox कंट्रोलर से चलने वाले लेजर हथियारों से ईरान की बढ़ाई मुश्किलें
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मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए और आधुनिक मोड़ पर पहुंच गया है। जहां एक ओर राजनीतिक मोर्चे पर राष्ट्रपति ट्रंप को गैस की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए गेम-चेंजिंग लेजर वेपन तैनात कर दिए हैं।

Xbox कंट्रोलर से शिकार हैरानी की बात यह है कि इन घातक लेजर हथियारों को चलाने के लिए किसी जटिल मशीनरी की नहीं, बल्कि एक मॉडिफाइड Xbox गेम कंट्रोलर का इस्तेमाल किया जा रहा है। रक्षा विभाग के अनुसार, इन हथियारों को संचालित करना वीडियो गेम खेलने जितना आसान है। यह तकनीक युद्ध के मैदान में सैनिकों के लिए कितनी सटीक और प्रभावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह ड्रोन और मिसाइलों को देखते ही ढेर करने में सक्षम है।

बिजली से चलता है यह अदृश्य हथियार पारंपरिक मिसाइल सिस्टम के उलट, इन लेजर हथियारों को किसी महंगे इंटरसेप्टर या गोला-बारूद की जरूरत नहीं पड़ती। इन्हें केवल बिजली (जनरेटर या बैटरी) की आवश्यकता होती है। एक बार चार्ज होने के बाद, यह लगातार कई फायर कर सकते हैं, जिससे इनका परिचालन खर्च नाममात्र का रह जाता है। अमेरिकी सेना ने इस प्रोजेक्ट पर करीब 50 करोड़ डॉलर का निवेश किया है।

कैसे काम करता है यह लेजर सिस्टम? यह हथियार बिजली को फोटॉन में बदलकर एक अदृश्य किरण (Beam) छोड़ता है। जब यह किरण किसी ड्रोन या मिसाइल पर पड़ती है, तो इसे ड्वेल टाइम कहा जाता है। किरण से पैदा हुई अत्यधिक गर्मी ड्रोन के सेंसर्स को तुरंत जला देती है, जिससे वह अपना नियंत्रण खो देता है और हवा में ही फट जाता है।

HELIOS: दुश्मन की आंखों पर अंधेरा अमेरिकी युद्धपोतों पर तैनात HELIOS (हाई-एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैजलर एंड सर्विलांस टेक्नोलॉजी) सिस्टम 60 किलोवाट की शक्तिशाली लेजर ले जाने में सक्षम है। इसमें लगा डैजलर दुश्मन के ड्रोन के कैमरों को पूरी तरह अंधा (Blind) कर सकता है। यह तकनीक विशेष रूप से 1300 पाउंड तक के ड्रोन को पल भर में मलबे में बदलने के लिए डिजाइन की गई है।

भविष्य का युद्ध अब स्क्रीन पर अमेरिका पिछले 50 वर्षों से इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा था और मेक्सिको सीमा पर सफल परीक्षणों के बाद अब इसे सीधे ईरान के खिलाफ तैनात कर दिया गया है। यह तकनीक न केवल युद्ध के स्वरूप को बदल रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि आने वाले समय में सैन्य मुकाबले गेमिंग कंट्रोलर की तरह चुटकियों में लड़े जाएंगे।

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