प्रशांत महासागर में उभरा सुपर एल नीनो दुनिया के लिए एक बड़ी आपदा का संकेत बन गया है। शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। अगले 6 महीनों में यह मौसमी पैटर्न 11 देशों में करीब साढ़े 4 लाख लोगों की जान ले सकता है।
क्या है सुपर एल नीनो? एल नीनो तब घोषित किया जाता है जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है। लेकिन इस बार, यह तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अनुमान है, जिसे सुपर एल नीनो कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिछले 20 वर्षों में सबसे गर्म दौर होगा।
भारत पर कितना बड़ा खतरा? रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस आपदा के निशाने पर है। देश में भीषण गर्मी के कारण लगभग 16,000 लोगों की जान जाने का अंदेशा है। इसमें से करीब 7,500 मौतें केवल दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच होने की आशंका जताई गई है। जलवायु परिवर्तन ने धरती का संतुलन बिगाड़ दिया है, जिससे बेमौसमी बारिश, सूखा और बीमारियां बढ़ रही हैं।
दुनिया भर में तबाही की आहट सुपर एल नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया में 31,400, सूडान में 17,500, इंडोनेशिया में 19,300, ब्राजील में 13,300 और फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड व कंबोडिया में कुल 19,400 लोगों की जान जा सकती है। कुल 11 देशों को इस आपदा के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।
फरवरी 2027 तक बरकरार रहेगा संकट विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, एल नीनो अभी अपनी शुरुआती अवस्था में है और नवंबर-दिसंबर तक यह अपने चरम पर पहुंच जाएगा। फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना 100 प्रतिशत है। अमेरिका के NOAA का कहना है कि समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री ऊपर है, जो सर्दियों में भी भयंकर गर्मी का अहसास कराएगा।
चेतावनी को गंभीरता से लेने की जरूरत विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावित देश समय रहते एहतियाती कदम उठाएं, तो मौतों के आंकड़ों को कम किया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे इस प्राकृतिक संकट से निपटने के लिए अब रणनीतिक तैयारी की तत्काल आवश्यकता है।
We could be heading for a Super El Niño 🦸🌀
— UNDRR (@UNDRR) September 18, 2026
El Niño is declared when Pacific temperatures rise 0.5°C above average. Forecasts suggest 2026 could see rises of 2–3°C.
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