UNGA में जयशंकर की कूटनीतिक आंधी : फ्रांस से लेकर V4 तक, बदले वैश्विक समीकरण
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न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने वैश्विक मंच का उपयोग करते हुए न केवल भारत के रणनीतिक संबंधों को मजबूती दी, बल्कि सुरक्षा परिषद में सुधार और वैश्विक शांति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा।

फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर जयशंकर की कूटनीतिक शुरुआत फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ हुई। दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस की विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर चर्चा की। बातचीत का मुख्य केंद्र यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव रहा। दोनों देशों ने होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया, जो वैश्विक व्यापार के लिए जीवन रेखा समान हैं।

आर्थिक रिश्तों का विस्तार इक्वाडोर के विदेश मंत्री रॉबर्टो कुरी के साथ बैठक में ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। वहीं, स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के साथ चर्चा में भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के क्रियान्वयन पर संतोष जताया गया। यह समझौता आने वाले समय में निवेश के नए द्वार खोलेगा।

V4 देशों के साथ नई शुरुआत विदेश मंत्री ने विसेग्राद समूह (V4 - पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य) के साथ ऐतिहासिक पहली बैठक की। इस दौरान रक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक वार्षिक बिजनेस फोरम स्थापित करने का बड़ा फैसला लिया गया। हंगरी की उप प्रधानमंत्री अनीता ओरबान और स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार के साथ भी उनकी उत्पादक बैठकें रहीं।

सुरक्षा परिषद में सुधार की गूंज जयशंकर की बैठकों का सबसे अहम हिस्सा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग रही। भारत लंबे समय से स्थायी सदस्यता के विस्तार की वकालत कर रहा है, और न्यूयॉर्क में हो रही इन मुलाकातों में उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति का प्रमुख एजेंडा बनाए रखा है।

26 सितंबर को होगा मुख्य संबोधन जयशंकर का न्यूयॉर्क दौरा अभी जारी है। कूटनीतिक गलियारों में उनकी सक्रियता यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए एक प्रमुख वॉइस बनकर उभरा है। अब दुनिया की निगाहें 26 सितंबर पर टिकी हैं, जब विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे और भारत का वैश्विक दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखेंगे।

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