भारत में चीतों की ऐतिहासिक वापसी: 56 पहुंची संख्या, जानिए क्यों जरूरी है इनका होना
News Image

प्रकृति से विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को दोबारा वापस लाना न केवल कठिन है, बल्कि लगभग नामुमकिन माना जाता है। लेकिन भारत ने इस धारणा को गलत साबित कर दिखाया है। 1952 में भारत से विलुप्त घोषित किए गए चीते आज फिर से भारतीय जंगलों में अठखेलियां कर रहे हैं। प्रोजेक्ट चीता की सफलता ने भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

56 हुई चीतों की संख्या

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इनमें से 36 चीतों का जन्म भारत की धरती पर हुआ है। सरकारी आंकड़ों के साझा होते ही वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। यह प्रोजेक्ट चीता की एक बड़ी कामयाबी है, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है।

क्यों जरूरी है चीता?

चीता केवल एक शिकारी जानवर नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का मुख्य स्तंभ है। ये मुख्य रूप से हिरण, चिकारे और गजेल जैसे शाकाहारी जानवरों का शिकार करते हैं। यदि जंगल में चीता जैसे शिकारी न हों, तो इन शाकाहारी जानवरों की संख्या बेतहाशा बढ़ जाएगी। इससे वनस्पति और घास के मैदानों को भारी नुकसान पहुंच सकता है, जिसे ट्रॉफिक कैस्केड (Trophic Cascade) कहा जाता है।

खाद्य श्रृंखला का रक्षक

चीते का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि यह जंगल की पूरी खाद्य श्रृंखला को सक्रिय रखता है। चीता अक्सर बीमार या कमजोर जानवरों का शिकार करता है, जिससे जंगल में स्वस्थ जानवरों की आबादी बनी रहती है। इसके अलावा, चीतों द्वारा छोड़े गए भोजन के अवशेष गिद्धों, लकड़बग्घों और सियारों जैसे सफाईकर्मियों (Scavengers) का पेट भरते हैं। इस तरह एक शिकारी जानवर पूरे जंगल के पोषण चक्र को संतुलित रखता है।

वाइल्डलाइफ लीडर की ओर मध्यप्रदेश

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती आबादी के साथ ही मध्यप्रदेश अब टाइगर स्टेट के खिताब से आगे बढ़कर वाइल्डलाइफ लीडर बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दे रही है। यह न केवल पारिस्थितिकी संतुलन के लिए जरूरी है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के लिए भी एक अमूल्य धरोहर है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

बिहार बाढ़: गरीबों को उबरने में लगती हैं पीढ़ियाँ , संकट में साथ आए सोनू सूद और अन्य सितारे

Story 1

आज की 10 बड़ी खबरें: अमेरिका में उड़ानों का संकट, रूस में पुतिन की आंधी और भारत के नए सख्त नियम

Story 1

शी जिनपिंग के लिए ट्रंप का आउट ऑफ प्रोटोकॉल स्वागत: क्या है इसके पीछे का बड़ा सियासी खेल?

Story 1

क्या वंदे मातरम के 6 अंतरे गाना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Story 1

जमुई कांड पर RJD विधायक भाई वीरेंद्र का बड़ा बयान: ऐसे अपराधियों का एनकाउंटर ही एकमात्र रास्ता

Story 1

जमुई कांड पर आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र का बड़ा हमला, बोले- दोषियों पर अब चाबुक चलाना ही होगा

Story 1

भारत-जापान मैच का अंपायर ड्रामा : श्रेयस अय्यर की जिद के आगे पलटा फैसला, बाल-बाल बची टीम इंडिया

Story 1

72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स: धुरंधर पर सवाल टालकर आदित्य धर ने यामी गौतम पर रखा पूरा फोकस

Story 1

IND vs JPN: जापान दौरे पर वैभव सूर्यवंशी को नहीं मिली जगह, कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर चुनी बल्लेबाजी

Story 1

महाराष्ट्र का पॉलिटिकल ड्रामा: राहुल गांधी के एक फोन कॉल ने बचा लिया कांग्रेस का विकेट