बांग्लादेश इस वक्त पिछले 20 वर्षों के सबसे गंभीर बिजली संकट से गुजर रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि अस्पतालों में डॉक्टरों को टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। देश का बड़ा औद्योगिक ढांचा चरमरा गया है और फैक्ट्रियों पर ताले लटक रहे हैं।
आंकड़ों में संकट की भयावहता बांग्लादेश में बिजली की मांग 16,345 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि उत्पादन मात्र 12,788 मेगावाट हो रहा है। करीब 3,557 मेगावाट का यह बड़ा अंतर देश के कई हिस्सों में रोजाना 3 से 10 घंटे के पावर कट का कारण बन रहा है। मयमनसिंह, बारिशाल, रंगपुर, सिलहट और खुलना जैसे शहर सबसे अधिक प्रभावित हैं।
गारमेंट सेक्टर की कमर टूटी बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गारमेंट सेक्टर पर इस संकट का गहरा असर पड़ा है। बीकेएमईए (BKMEA) के सर्वे के मुताबिक, 55% निटवेयर फैक्ट्रियों के ऑर्डर रद हो गए हैं। बिजली न होने के कारण डाइंग और सिलाई का उत्पादन 40-50% तक गिर चुका है। गैस की कमी के चलते करीब 600 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।
ईंधन का अभाव और गैस की किल्लत बांग्लादेश के पास पावर प्लांट तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए ईंधन (प्राकृतिक गैस) की भारी कमी है। देश की करीब 44% बिजली गैस आधारित है, लेकिन घरेलू उत्पादन लगातार घटने से प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
राजनीतिक घमासान तेज विपक्षी अवामी लीग ने बीएनपी (BNP) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस सरकार को भारी बहुमत के साथ सत्ता मिली, वह सात महीनों में भी ऊर्जा संकट को सुलझाने में नाकाम रही है। अवामी लीग का कहना है कि गैस का प्रेशर 78% तक गिर जाना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
भारत पर टिकी उम्मीदें, लेकिन राह आसान नहीं संकट के बीच बांग्लादेश भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। भारत पहले ही बांग्लादेश को 2,656 मेगावाट से अधिक बिजली की आपूर्ति कर रहा है। हालांकि, भारत के लिए भी अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को देखते हुए तत्काल अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है।
रिन्यूएबल एनर्जी में पिछड़ा बांग्लादेश विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की यह स्थिति दूरदर्शिता की कमी का परिणाम है। सेंटर फॉर एनर्जी रिसर्च के निदेशक शहरयार अहमद चौधरी के अनुसार, जहां भारत, भूटान और नेपाल ने सौर और पवन ऊर्जा जैसे रिन्यूएबल सोर्स में बड़ी प्रगति की है, वहीं बांग्लादेश आज भी कुल बिजली उत्पादन का मात्र 6% ही अक्षय स्रोतों से हासिल कर पा रहा है।
🇧🇩 Bangladesh’s Power Crisis Deepens
— Bangladesh Awami League (@albd1971) September 11, 2026
Severe load-shedding is gripping Bangladesh as the power shortfall surpasses 3,500 MW.
Demand has reached 16,345 MW, but generation stands at just 12,788 MW, leaving a deficit of 3,557 MW.
A sudden drop in supply from an Adani Power unit,… pic.twitter.com/5fVWbDgTmv
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