पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीया जलाओ कार्यक्रम को लेकर सियासी घमासान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिले निर्देश!
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश में शुरू हुआ दीया जलाओ अभियान विवादों के घेरे में आ गया है। विपक्षी दल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत ब्रांडिंग की जा रही है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव का आरोप CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक ईमेल साझा करते हुए दावा किया कि मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रामीण महिलाओं को जुटाने, उन्हें दीये थमाने और पीएम मोदी के जन्मदिन पर प्रशंसा करते हुए वीडियो रिकॉर्ड करने के आदेश दिए गए हैं। आरोप है कि निर्देशों का पालन न करने पर नौकरी से जुड़े दबाव और कार्रवाई की धमकी दी गई है।

कृतज्ञता भी क्या अब बनवाई जाएगी? सौरव दास ने इस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कम मानदेय और काम के भारी बोझ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, सरकार अपनी ऊर्जा उनके कल्याण के बजाय प्रधानमंत्री की तारीफ करवाने में क्यों खर्च कर रही है? उन्होंने कहा कि यदि काम हुआ है, तो तारीफ स्वाभाविक होनी चाहिए, जबरन नहीं।

विपक्ष का तंज: महामानव का जन्मदिन वहीं, CJP नेता आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरा। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों से दीया जलाने के कार्यक्रमों में भागीदारी की अपेक्षा करने पर सवाल उठाए। रांका ने तंज कसते हुए कहा कि दीया जलाते समय स्कूलों की तस्वीरें भी साझा की जानी चाहिए, ताकि महामानव को देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का हाल भी दिख सके।

भाजपा का सेवा संकल्प अभियान दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी इसे एक व्यापक जनसंपर्क अभियान के रूप में देख रही है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम मुख्य है। पार्टी का तर्क है कि यह अभियान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जनसेवा को समर्पित है।

सरकारी मशीनरी बनाम राजनीतिक प्रचार हालांकि, वायरल ईमेल और दावों की अभी तक कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस घटना ने एक पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है कि क्या सरकारी तंत्र का उपयोग किसी नेता की निजी छवि सुधारने या राजनीतिक प्रचार के लिए किया जाना चाहिए? फिलहाल, इस मामले पर मध्य प्रदेश प्रशासन और संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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