क्या बिखरने वाला है यूनाइटेड किंगडम? स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड मिलकर करेंगे आजादी का आगाज
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यूनाइटेड किंगडम (UK) के अस्तित्व पर एक गहरा संकट मंडरा रहा है। कार्डिफ में हुए एक गुप्त राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि यूके को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सोमवार को होने वाली एक अभूतपूर्व बैठक ब्रिटेन के इतिहास की दिशा बदल सकती है।

ऐतिहासिक समझौते की तैयारी

स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेता एक मंच पर जुट रहे हैं। इस बैठक में स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी, वेल्स के रून एप आयोवर्थ और उत्तरी आयरलैंड की मिशेल ओ नील एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यूके से अलग होने के लिए नए जनमत संग्रह (Referendum) की राह को प्रशस्त करना है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटेन के इतिहास में यह पहली बार है जब इन तीनों क्षेत्रों में एक साथ आजादी का समर्थन करने वाली सरकारें सत्ता में हैं। यह त्रिस्तरीय गठबंधन ब्रिटेन के नवनियुक्त प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।

प्रधानमंत्री बर्नहैम की मुश्किलें बढ़ीं

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने हाल ही में संकेत दिए थे कि यदि स्पष्ट सहमति बनती है, तो वह स्कॉटिश जनमत संग्रह की मंजूरी दे सकते हैं। हालांकि, स्कॉटिश नेता जॉन स्विनी का दावा है कि बर्नहैम यूके के आखिरी प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास में दर्ज हो सकते हैं।

मामले में अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में उत्तरी आयरलैंड के गणराज्य में विलय का समर्थन करने वाले बयान ने आग में घी का काम किया है।

चार बड़े मुद्दों पर केंद्रित रोडमैप

कार्डिफ के सेंट डेविड्स होटल में होने वाली इस बैठक में नेता चार मुख्य बिंदुओं पर एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे:

  1. अर्थव्यवस्था: स्वतंत्र राष्ट्रों की आर्थिक नीतियों का ढांचा।
  2. ऊर्जा और यूरोपीय संघ (EU): स्कॉटलैंड और वेल्स का आजादी के बाद सीधे तौर पर यूरोपीय संघ में शामिल होने का लक्ष्य।
  3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक स्तर पर स्वतंत्र पहचान बनाना।
  4. आत्मनिर्णय का अधिकार: यूके से पूर्ण स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह की प्रक्रिया।

पोस्ट-यूके भविष्य की आहट

उत्तरी आयरलैंड के लिए योजना स्पष्ट है; गुड फ्राइडे एग्रीमेंट की शर्तों के तहत रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड के साथ विलय कर दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनना। जॉन स्विनी ने साफ कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था अब टिकाऊ नहीं है और वेस्टमिंस्टर को पोस्ट-यूके (यूके के बाद के) भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए।

यह गठबंधन ब्रिटेन की केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री बर्नहैम इस बिखराव को रोक पाएंगे या ब्रिटेन का मानचित्र हमेशा के लिए बदल जाएगा।

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