ब्रिक्स समिट के बीच राष्ट्रपति भवन पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति: ईरानी हॉल के दौरे के पीछे क्या है संदेश?
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ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का दौरा काफी चर्चा में है। समिट में व्यस्त कार्यक्रमों के बीच पेजेशकियन ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक ‘ईरानी हॉल’ का दौरा किया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

आखिर क्या है ईरानी हॉल का महत्व?

राष्ट्रपति भवन के भीतर बना यह हॉल भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रतीक है। यह हॉल मूल रूप से ईरान के काजार वंश के शासक फतेह-अली शाह के काल से जुड़ा है। भारत और फारस (ईरान) के बीच कला, वास्तुकला और साहित्य का जो गहरा नाता रहा है, उसकी झलक इस हॉल के शिलालेखों और वास्तुकला में साफ दिखाई देती है।

कूटनीति के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव

ईरानी राष्ट्रपति का इस हॉल को देखना महज एक प्रोटोकॉल विजिट नहीं था। यह भारत की ओर से एक बड़ा संदेश है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल आज की भू-राजनीति या रणनीतिक जरूरतों तक सीमित नहीं हैं। भारत-ईरान के बीच सभ्यतागत संबंधों की जड़ें काफी गहरी हैं, जिन्हें यह दौरा फिर से रेखांकित करता है।

ब्रिक्स के मंच पर भारत-ईरान के नए समीकरण

पेजेशकियन ऐसे समय में भारत आए हैं जब नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चल रहा है। ईरान अब ब्रिक्स का नया सदस्य है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नया आयाम मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान समुद्री सुरक्षा, व्यापार और पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

वर्तमान कूटनीति का हिस्सा

विशेषज्ञ इसे भारत की संतुलित कूटनीति के रूप में देख रहे हैं। एक तरफ जहां भारत पश्चिम एशिया के अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ अपनी ऐतिहासिक और रणनीतिक साझेदारी को बरकरार रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

प्रतीकात्मक संकेत

भले ही आधिकारिक सूत्रों ने इसे किसी बड़े राजनीतिक समझौते से जोड़ने से इनकार किया हो, लेकिन ईरानी हॉल के दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-ईरान के रिश्ते किसी एक सम्मेलन या मुद्दे के मोहताज नहीं हैं। यह यात्रा इतिहास, संस्कृति और आधुनिक कूटनीति का एक अनूठा संगम है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग का आधार भी बन सकता है।

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