अमेरिका में मिस्टर सिंह वाले पोस्टर पर मचा बवाल, सरकार को झुककर हटाना पड़ा विवादित विज्ञापन
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अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने एक एआई-जेनरेटेड पोस्टर जारी कर बड़े विवाद को जन्म दे दिया था। इस पोस्टर में भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों, विशेषकर सिख समुदाय को निशाना बनाया गया था। भारी विरोध के बाद विभाग ने इसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से हटा लिया है।

क्या था पोस्टर में? DHS ने एक रोबोट की तस्वीर साझा की थी, जिसके सामने सिर ढके हुए एक दक्षिण एशियाई व्यक्ति को दिखाया गया था। पोस्टर पर लिखा था, हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह। यह अभियान बिना लाइसेंस वाले कमर्शियल ड्राइवरों के खिलाफ था, लेकिन जिस तरह से मिस्टर सिंह नाम का इस्तेमाल किया गया, उसे नस्लवादी माना गया।

सिख और हिंदू संगठनों का कड़ा विरोध पोस्टर के सामने आते ही सिख और हिंदू संगठनों ने कड़ा रुख अपना लिया। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन, सिख कोएलिशन और हिंदू एक्शन जैसे समूहों ने इसे अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ बताया। संगठनों का कहना था कि यह अभियान सीधे तौर पर एक धर्म और समुदाय विशेष को बदनाम करने की कोशिश है।

राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम और सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी इसकी कड़ी आलोचना की। कृष्णमूर्ति ने कहा कि अमेरिका में 1.60 लाख से ज्यादा लोगों का सरनेम सिंह है। सरकार को किसी की पहचान या विरासत के आधार पर उसे निशाना नहीं बनाना चाहिए। वहीं, सीनेटर एडम शिफ ने इसे घृणित और शर्मनाक करार दिया।

DHS का पलटवार और सफाई पोस्टर हटाने के बावजूद DHS ने अपनी सफाई में राज्य सरकारों पर निशाना साधा। विभाग ने आरोप लगाया कि कैलिफोर्निया के गवर्नर ने अवैध प्रवासियों को लाइसेंस दिए हैं। विभाग ने एक ट्रक ड्राइवर के सड़क हादसे का जिक्र करते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की, जिससे विवाद और गहरा गया।

क्या है असली मकसद? यह पूरा विवाद DHS के CBP होम कार्यक्रम के प्रचार के दौरान हुआ। इस कार्यक्रम के तहत अवैध प्रवासियों को स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार इसके बदले प्रवासियों को यात्रा में मदद और 2,600 डॉलर का एग्जिट बोनस भी दे रही है।

9/11 के 25 साल बाद भी नस्लवाद का दंश सिख कोएलिशन ने चिंता जताई है कि 9/11 घटना के 25 साल बाद भी सिखों को उनके हुलिए के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना ने अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के बीच असुरक्षा की भावना को फिर से हवा दे दी है। फिलहाल, DHS द्वारा इस विवादास्पद कैंपेन को वापस लेना एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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