उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक हालिया बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी समाज को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। पत्रकारों के सवाल लेने के दौरान अखिलेश ने कहा, कुशवाहा, सैनी, मौर्य और शाक्य समाज के साथी सवाल न करें, आज पढ़े-लिखे और बुद्धिजीवी लोग आए हैं। उन्हीं को सवाल करने दीजिए। अखिलेश के इस बयान को भाजपा ने पिछड़े समाज का अपमान करार देते हुए इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है।
भाजपा का तीखा हमला भाजपा ने इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। पार्टी ने ट्वीट करते हुए कहा, अखिलेश जी, ये समाज आपका राजनीतिक मोहरा नहीं है। जो समाज यूपी की प्रगति में अपना पसीना बहाता है, उसका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा का आरोप है कि पिछड़े समाज को अपमानित करना सपा की पुरानी नीति है।
केशव प्रसाद मौर्य का पलटवार उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि 2012-2017 की सपा सरकार में गुंडाराज और अत्याचार हुआ था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महापुरुषों के नाम पर अब वोट की राजनीति करने के दिन लद चुके हैं और केर-बेर का साथ संभव नहीं है।
सपा की सफाई और PDA का दांव सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा बातों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह कर रही है। सपा का मानना है कि उनका PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला पूरी तरह दुरुस्त है। पार्टी इसे भाजपा की हताशा की राजनीति करार दे रही है।
वोट बैंक की असली लड़ाई सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह केवल एक बयान का विवाद नहीं, बल्कि 2027 की तैयारी है। मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी जातियां उत्तर प्रदेश में बड़ा वोटबैंक हैं, जो कई सीटों पर हार-जीत तय करती हैं। भाजपा जहां इस वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, वहीं अखिलेश अपने PDA समीकरण को धार देने में जुटे हैं।
2027 से पहले यह जातीय समीकरण यूपी की राजनीति में और गरमाएगा। सवाल यह है कि क्या भाजपा इस मुद्दे को पिछड़े समाज के अपमान के रूप में भुना पाएगी, या सपा इसे अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत मैनेज कर लेगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात साफ है कि इन जातियों पर कब्जे की जंग अभी लंबी चलेगी।
अखिलेश यादव जी… कुशवाह, सैनी, मौर्य और शाक्य समाज आपका राजनीतिक मोहरा नहीं है।
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) September 7, 2026
जिस समाज ने उत्तर प्रदेश की प्रगति में अपना पसीना बहाया, उसका अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पिछड़े समाज को अपमानित करना ही सपा की मूल नीति है। पिछड़ा समाज आपको सारी ABCD याद दिला… pic.twitter.com/uk5zzdTy9S
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