चीन के एक ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सोहू’ ने एक सनसनीखेज विश्लेषण प्रकाशित किया है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि चीन अभी अरुणाचल प्रदेश पर हमला करने या कोई बड़ा सैन्य दुस्साहस करने की स्थिति में क्यों नहीं है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब सीमा पर तनाव के बीच ड्रैगन की रणनीतियों पर पूरी दुनिया की नजर है।
कुदरत से हार रही चीनी सेना चीनी विश्लेषकों का मानना है कि अरुणाचल में उनका सबसे बड़ा दुश्मन भारतीय सेना से अधिक वहां की भौगोलिक स्थिति है। चीन कबूलता है कि वहां का मौसम और कठिन इलाका रसद सप्लाई के लिए सबसे बड़ी बाधा है। सर्दियों में चीन के लिए फ्रंट लाइन पर तैनात सैनिकों तक राशन, ईंधन और गोला-बारूद पहुंचाना एक नामुमकिन चुनौती जैसा है।
सप्लाई चेन का अधूरा जाल रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में चीन ने ल्हासा-न्यिंगची रेलवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं, लेकिन फ्रंट लाइन तक लास्ट माइल कनेक्टिविटी अभी भी अधूरी है। हालांकि, चीन दोशुंगला टनल और पाइमो हाईवे जैसे प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है ताकि मेटोक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के जरिए सैन्य और ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित किया जा सके, लेकिन यह काम अभी पूरा नहीं हुआ है।
1962 की गलती से सबक चीनी लेख में 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए पुरानी गलतियों को याद किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि उस वक्त रसद न पहुंचा पाना चीन की एक रणनीतिक भूल थी। चीन आज भी इस बात से डरता है कि जल्दबाजी में की गई कोई भी सैन्य कार्रवाई उसकी सेना को दुर्गम पहाड़ियों में अलग-थलग कर सकती है, जिससे उसे भारी पराजय का सामना करना पड़ सकता है।
भारत की बदलती रणनीतिक ताकत जवाब में भारत ने भी अरुणाचल में बुनियादी ढांचे का जाल बिछाया है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारत ने विवादित सीमा को मौसमी मौजूदगी के स्थान पर स्थायी और रणनीतिक सीमा में बदल दिया है। सड़कें, सुरंगें और सैन्य सुविधाएं बनने के बाद चीन को अब यह एहसास होने लगा है कि अरुणाचल प्रदेश पर उसकी कोई भी चाल अब सफल नहीं होगी।
रणनीतिक इंतजार या प्रोपेगेंडा? विशेषज्ञ इसे चीन का ‘हॉट शेल्विंग’ गेम मान रहे हैं। यानी, जब तक चीन का इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक वह सैन्य युद्ध से बचकर कूटनीति और छोटी-मोटी घुसपैठ के जरिए भारत को उलझाए रखना चाहता है। यह रिपोर्ट चीन की एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल भी हो सकती है, जिससे वह अपनी सैन्य अक्षमता को छिपाते हुए भविष्य के लिए वक्त मांग रहा है।
Chinese answer to a key question Why can t PLA capture Indian state of Arunachal Pradesh today? . An unofficial Chinese article at https://t.co/VndFZpvfuR (link given at end) first gives the infrastructure development which has taken place and what is balance & then concluding… pic.twitter.com/CT432WB1XW
— Anshuman Narang (@anshu217) September 7, 2026
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