चीन से संवाद जरूरी, पाकिस्तान पर भरोसा नामुमकिन : पूर्व CDS अनिल चौहान का सुरक्षा पर कड़ा संदेश
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देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर दो टूक राय रखी है। उन्होंने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के प्रति भारत के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर को रेखांकित करते हुए एक कड़ा संदेश दिया है।

चीन के साथ तनाव के बीच कूटनीति का महत्व

दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व CDS ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा विवाद के बावजूद चीन के साथ बातचीत के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि भारत और चीन, दोनों ही एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्राचीन सभ्यताएं हैं।

उन्होंने कहा, हमारे संबंधों को सिर्फ सीमा विवाद का बंधक नहीं बनाया जा सकता। हम सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों कर रहे हैं। जनरल चौहान के अनुसार, SCO और BRICS जैसे मंचों के जरिए संवाद बनाए रखना भविष्य के लिए जरूरी है, ताकि एशिया के उभरते संतुलन को बेहतर आकार दिया जा सके।

पाकिस्तान: एक निरंतर बना रहने वाला खतरा

पाकिस्तान के संबंध में जनरल चौहान ने स्पष्ट चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय तक भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा बना रहेगा। पाकिस्तान की रणनीति पारंपरिक युद्ध से बचकर आतंकवाद और छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) को बढ़ावा देने की रही है।

उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते पाकिस्तान में गैर-जरूरी ओवर-कॉन्फिडेंस पैदा कर सकते हैं, जिससे वह कोई गलत आकलन कर सकता है।

आतंकवाद की कीमत बढ़ाना ही एकमात्र समाधान

पूर्व CDS ने साफ किया कि केवल आतंकी संगठनों को खत्म करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उन्हें लगातार सरकारी मदद मिलती रहती है। उन्होंने कहा कि सीमा-पार आतंकवाद पर अंकुश लगाने का एकमात्र तरीका है कि भारत उसकी कीमत इतनी बढ़ा दे कि पाकिस्तान इसे सरकारी नीति के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने से तौबा कर ले।

जनरल चौहान ने उरी और बालाकोट जैसे हमलों का जिक्र करते हुए क्रेडिबल डेटरेंस (विश्वसनीय प्रतिरोध) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और अन्य कठोर फैसलों के जरिए भारत ने यह साबित किया है कि हम दुश्मन को करारा जवाब देने में सक्षम हैं।

सुरक्षा के प्रति चौकन्ना रहने की जरूरत

अंत में, जनरल चौहान ने आगाह किया कि भले ही भारत ने कड़े फैसले लिए हों, लेकिन पड़ोसी की फितरत को देखते हुए भारत को अपनी सेना और सुरक्षा तंत्र को हमेशा हाई अलर्ट पर रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की ढिलाई बरतने की गुंजाइश नहीं है।

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