क्या बदलेगा दुनिया का 500 साल पुराना नक्शा? UNGA में भारत-चीन-रूस एकजुट, अमेरिका अलग-थलग
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जो दुनिया के भूगोल को देखने के हमारे नजरिए को पूरी तरह बदल सकता है। टोगो द्वारा पेश किए गए इस करेक्ट द मैप प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जिसका उद्देश्य वैश्विक मानचित्र पर महाद्वीपों के वास्तविक आकार को सही और समान अनुपात में दर्शाना है।

मर्केटर मैप: क्यों है 1569 का नक्शा विवादित? वर्तमान में दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला मर्केटर प्रोजेक्शन 1569 में समुद्री जहाजों के नेविगेशन के लिए बनाया गया था। चूंकि पृथ्वी गोल है और नक्शा चपटा, इसलिए इसे बनाने में उत्तर और दक्षिण के इलाकों का आकार जरूरत से ज्यादा फैला दिया गया।

इस नक्शे की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया को उनकी वास्तविक तुलना में बहुत छोटा दिखाता है। उदाहरण के तौर पर, नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग बराबर दिखते हैं, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है।

इक्वल अर्थ की ओर बढ़ा कदम UNGA में पारित प्रस्ताव में इक्वल अर्थ (Equal Earth) प्रोजेक्शन को अपनाने की वकालत की गई है, जिसे 2018 में विकसित किया गया था। यह नया नक्शा महाद्वीपों के वास्तविक आकार और अनुपात को सटीकता के साथ प्रदर्शित करता है। टोगो ने तर्क दिया है कि सदियों पुराने नक्शों ने दुनिया के बारे में हमारी धारणाओं और शैक्षणिक समझ को असंतुलित कर दिया है।

भारत का रुख: तकनीकी स्पष्टीकरण के साथ समर्थन भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए एक अहम शर्त रखी है। भारत के प्रथम सचिव राघू पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत इस बदलाव का स्वागत करता है, लेकिन इसे किसी एक खास नक्शे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि इक्वल एरिया (Equal Area) नक्शों के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा मिलना चाहिए, न कि केवल इक्वल अर्थ को। भारत ने जोर दिया कि नक्शों के इस्तेमाल में तकनीकी तटस्थता होनी चाहिए।

अमेरिका का कड़ा विरोध और पाकिस्तान की स्थिति इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने वाला अमेरिका अकेला प्रमुख देश रहा। अमेरिकी प्रतिनिधि यारीना फेरेंसेविच ने इसे समय की बर्बादी करार देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को शांति और वैश्विक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शों की बहस पर।

वहीं, पाकिस्तान ने प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन साथ ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। पाकिस्तान ने कहा कि यह कदम केवल शैक्षणिक और भौगोलिक सुधार के लिए है। इसका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा विवादित क्षेत्रों की स्थिति पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ेगा।

क्या यह बदलाव अनिवार्य है? यूएन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव किसी भी देश पर नए नक्शे को थोपता नहीं है। यह केवल एक वैश्विक पहल है जो शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और सरकारों को जागरूक करने के लिए प्रेरित करती है। हालांकि, 164 देशों के समर्थन से यह साफ है कि दुनिया अब पुरानी भौगोलिक धारणाओं से बाहर निकलकर एक निष्पक्ष और यथार्थवादी वैश्विक छवि की ओर बढ़ना चाहती है।

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