सिर फोड़ा, 307 बनती थी, फिर भी बेखौफ घूमता रहा : राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक पुराने प्रदर्शन से जुड़ा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक बवंडर में बदल गया है। हिंदुत्व कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज का एक कथित पॉडकास्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने एक प्रदर्शनकारी के पिता पर जानलेवा हमले की बात बड़े गर्व से स्वीकार की है।

60 टांके, फिर भी कानून की पकड़ से दूर?

पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि उन्होंने निशु आजाद के पिता संजय के सिर पर हमला किया था, जिसके चलते उन्हें करीब 60 टांके आए। भारद्वाज ने खुद माना कि इस हमले में हत्या के प्रयास (IPC की धारा 307) का मामला बनता था, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि घटना के बाद वे पूरी रात दिल्ली की सड़कों पर बेखौफ घूमते रहे और उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा।

कपिल मिश्रा के फोन ने बचा लिया

भारद्वाज ने अपनी सुरक्षित स्थिति के पीछे राजनीतिक रसूख का हवाला दिया है। उन्होंने दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को अपना बड़ा भाई बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी अपना समर्थन जाहिर किया। भारद्वाज का आरोप है कि कपिल मिश्रा के एक फोन कॉल के कारण ही दिल्ली पुलिस ने उन्हें नहीं पकड़ा।

दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पॉडकास्ट में भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस के साथ अपने करीबी संबंधों का भी संकेत दिया है। उन्होंने अपने पास पुलिस के जूते और डंडे होने की बात कही, जिससे कानून-व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्षी दल इसे कानून के खुले उल्लंघन के तौर पर देख रहे हैं।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह को घेरा

मामले में घायल संजय की बेटी निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में उनकी FIR दर्ज नहीं की और मेडिकल रिपोर्ट के नाम पर टालमटोल करती रही। निशु की इस अपील पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सीधा सवाल किया है। उन्होंने पूछा कि एक दलित व्यक्ति का सिर फोड़ने का दावा करने वाला व्यक्ति आज भी खुलेआम क्यों घूम रहा है? राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे अपराधियों को संरक्षण दे रही है।

जांच की मांग तेज

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले की गहन जांच की मांग की है। सवाल यह है कि यदि आरोपी के दावे सच हैं, तो क्या दिल्ली पुलिस ने वास्तव में राजनीतिक दबाव में काम किया? क्या कपिल मिश्रा या अन्य नेताओं की कथित भूमिका की जांच होगी? अब निगाहें दिल्ली पुलिस और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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