हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को 29वें दिन में प्रवेश कर गई है। राज्य भर में करीब 13,000 कर्मचारियों और सीवरमैन के काम बंद करने से शहरों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे कूड़े के ढेर अब महामारी का खतरा पैदा कर रहे हैं।
सरकार की पेशकश और कर्मचारियों का अड़ा रुख मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने गतिरोध खत्म करने के लिए कई प्रस्ताव दिए हैं। सरकार ने कर्मचारियों को हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी अधिनियम, 2024 में लाने और 60 वर्ष तक सेवा की सुरक्षा देने का वादा किया है। इसके अलावा, वेतन में बढ़ोतरी, ₹2,000 का जोखिम भत्ता और 15% अतिरिक्त राशि देने का भी ऑफर है। इसके बावजूद, कर्मचारी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और स्थाई समाधान चाहिए।
क्या है सियासी पेंच? यह हड़ताल केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकट भी बन गई है। हरियाणा की लगभग 20% दलित आबादी और 90 में से 17 आरक्षित विधानसभा सीटों का खेल सफाई कर्मचारी समुदाय से प्रभावित होता है। मुख्य रूप से वाल्मीकि समाज से जुड़े ये कर्मचारी सरकार की चुनावी गणित को बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि भाजपा सरकार बैकफुट पर दिख रही है।
कांग्रेस का हमला और बढ़ती सख्ती विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। विधायक गीता भुक्कल ने आरोप लगाया कि सरकार मामले को सुलझाने के बजाय केवल टाल रही है, जिससे आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। वहीं, अब प्रशासन सख्ती पर उतर आया है। सोनीपत के गोहाना में कूड़ा उठान में बाधा डालने और वाहनों के टायर की हवा निकालने के आरोप में 22 कर्मचारियों पर केस दर्ज किया गया है।
पुलिस और कर्मचारियों के बीच तनातनी हड़ताल के दौरान कई जिलों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें देखने को मिली हैं। गिरफ्तारी और मुकदमों के बावजूद कर्मचारियों का तेवर नरम नहीं पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति नहीं देती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
अब देखना यह है कि सरकार की सख्ती और ऑफर का मिला-जुला फार्मूला इस गतिरोध को तोड़ पाता है या चुनावी साल में यह मुद्दा सरकार के लिए गले की फांस बनेगा।
*“सरकार ने सफाई कर्मियों की लगभग सभी मांगों पर सहमति देते हुए समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पालिका रोल पर कार्यरत सफाई कर्मियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा के साथ वेतन वृद्धि व अन्य लाभ भी मिलेंगे।
— DPR Haryana (@DiprHaryana) September 2, 2026
सभी सफाई कर्मी भाई-बहनों से अपील है कि वे काम पर लौटें और प्रदेश की… pic.twitter.com/cua7EHXgbI
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