NEET प्रदर्शन: FIR हटाने की मांग को लेकर केंद्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, अंबेडकर की किताब के साथ Dipke का मौन संदेश
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NEET पेपर लीक मामले के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। केंद्र सरकार ने आंदोलनकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है।

केंद्र सरकार की बड़ी पहल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिका रखते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई FIRs को खत्म किया जाए। यह मांग स्वीकार होने पर उन सभी छात्रों और कार्यकर्ताओं को बड़ी कानूनी राहत मिल सकती है, जिन पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप लगे थे।

अभियीत Dipke की प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया सरकार की इस पहल के बाद CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत Dipke ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में वे डॉ. बीआर अंबेडकर की किताब पकड़े नजर आए। Dipke ने कोई कैप्शन नहीं लिखा, लेकिन उनका मौन संदेश स्पष्ट था। संविधान के प्रतीक के जरिए उन्होंने इस कानूनी लड़ाई और आंदोलन के जुड़े संदर्भ को और गहरा कर दिया है।

व्यंग्य और मीम्स के जरिए विरोध Dipke के अलावा CJP नेता सौरभ दास ने भी एक सेल्फी पोस्ट की, जिसमें उनका अंदाज काफी व्यंग्यात्मक था। वहीं, संगठन के ही आशुतोष रंका ने एक मीम पोस्ट कर इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इन पोस्ट्स ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को और गरमा दिया है।

5 सितंबर के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सोमवार का दूसरा अहम घटनाक्रम 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP मार्च से जुड़ा रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मार्च पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। CJI की पीठ ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल यह मानना गलत होगा कि प्रदर्शन हिंसक होगा। कोर्ट ने माना कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी है।

आगे क्या होगा? CJP का दावा है कि सरकार ने जुलाई में आंदोलन खत्म कराने के दौरान जो वादे किए थे, वे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। इसी के चलते 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला जाएगा। अब सबकी नजरें मंगलवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुए मामलों को पूरी तरह खत्म करने का आदेश देगा या नहीं।

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