अमरावती शुद्धीकरण विवाद: अरविंद सावंत का बड़ा सवाल, बोले- क्या खड़गे को जय श्रीराम कहने का हक नहीं?
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अमरावती के रामलीला मैदान में हुई कथित शुद्धीकरण की घटना ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने इस मामले को गंभीर बताते हुए इसे सीधा जातिगत भेदभाव से जोड़ा है।

क्या दलित होने के कारण हुआ शुद्धीकरण ? विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को हुई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, एक स्थानीय धार्मिक संगठन ने मैदान में हवन-पूजन कर शुद्धिकरण किया।

अरविंद सावंत ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा, क्या खड़गे जी अनुसूचित जाति से आते हैं, इसलिए उन्हें रामलीला मैदान में जाने या जय श्रीराम बोलने का अधिकार नहीं है? उन्होंने इसे संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार का घोर अपमान करार दिया है।

संगठन और भाजपा का रुख शुद्धिकरण करने वाले धार्मिक संगठन का दावा है कि उन्होंने रैली के दौरान हुई कथित अभद्र टिप्पणियों और नारों के विरोध में यह कदम उठाया। वहीं, भाजपा ने इस पूरे विवाद से अपना पल्ला झाड़ लिया है और किसी भी प्रकार के संबंध होने से इनकार किया है।

अस्पतालों की बदहाली पर बरसे सावंत अमरावती दौरे पर आए अरविंद सावंत ने डफरीन अस्पताल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में वेंटिलेटर ब्लास्ट और आग लगने की घटनाओं पर स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जर हालत पर चिंता जताई। उन्होंने प्रशासन को फटकार लगाते हुए अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिक ऑडिट को अनिवार्य करने की मांग की।

वेंटिलेटर विस्फोट: जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल अमरावती जिला महिला अस्पताल में 24 अगस्त को 3 नवजात शिशुओं की मौत का मामला अभी भी गहराया हुआ है। हादसे की जांच के लिए गठित राज्यस्तरीय समिति पर ही अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 36 बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले इस बड़े हादसे की पड़ताल के लिए आई समिति महज एक दिन में ही जांच पूरी कर नागपुर लौट गई। इतने कम समय में समिति ने क्या सबूत जुटाए और तकनीकी खामियों का पता कैसे लगाया, इसे लेकर अब पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट 31 अगस्त को सरकार को सौंपी जानी है, लेकिन उससे पहले ही इसकी निष्पक्षता पर संदेह जताया जा रहा है।

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