सत्ता की चाबी और पूर्वांचल का गणित उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता हमेशा पूर्वांचल से होकर गुजरता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रयागराज सीट पर मिली जीत और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन ने इस क्षेत्र के सियासी समीकरण बदल दिए हैं। अब 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का हालिया प्रयागराज दौरा राज्य की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर रहा है।
जेन-जी से सीधा संवाद राहुल गांधी ने प्रयागराज के केपी ग्राउंड में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए सीधे जेन-जी (Gen-Z) से संपर्क साधा। यहाँ बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र जुटे, जो लंबे समय से शिक्षा और रोजगार के संकट से जूझ रहे हैं। यह कार्यक्रम केवल एक सभा नहीं, बल्कि यूथ वर्ग को साधने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
इलाहाबाद की नर्सरी के गंभीर सवाल कभी छात्र राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले प्रयागराज में छात्रों ने राहुल गांधी के सामने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का कच्चा-चिट्ठा रखा। फीस वृद्धि, छात्रसंघ चुनाव की बहाली, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सीटों में कटौती जैसे गंभीर मुद्दों पर छात्रों ने जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
पेपर लीक और युवाओं का आक्रोश संवाद के दौरान छात्रों ने सिपाही भर्ती, यूपी एसआई और आरओ-एआरओ जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का दर्द साझा किया। युवाओं ने शिकायत की कि सालों की मेहनत के बाद जब परीक्षाएं या तो रद्द हो जाती हैं या अदालत की फाइलों में फंस जाती हैं, तो पूरा भविष्य अधर में लटक जाता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर होने वाली कार्रवाई और एफआईआर का डर भी छात्रों के लिए बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है।
पूर्वांचल में यूथ-सेंट्रिक राजनीति प्रयागराज में पढ़ाई करने वाले लाखों छात्र जब वापस अपने गृह जिलों—जैसे प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर, वाराणसी और आजमगढ़—लौटेंगे, तो वे अपने साथ राहुल गांधी का यह सियासी संदेश भी ले जाएंगे। माना जा रहा है कि राहुल गांधी का यह दौरा आसपास के जिलों में कांग्रेस-सपा गठबंधन की जमीन मजबूत कर सकता है।
क्या जातिगत राजनीति से आगे बढ़ेगी कांग्रेस? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी अब जातिगत समीकरणों से इतर शिक्षा, रोजगार और भर्ती प्रक्रिया की खामियों जैसे यूथ-सेंट्रिक नैरेटिव पर जोर दे रहे हैं। कोटा के बाद प्रयागराज में छात्रों से जुड़ना यह संकेत देता है कि विपक्ष 2027 के चुनाव में युवाओं के असंतोष को अपना मुख्य हथियार बनाना चाहता है।
भाजपा का अपना पक्ष दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि राज्य सरकार ने पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां की हैं और पेपर लीक माफियाओं पर बुलडोजर जैसी सख्त कार्रवाई की है। बहरहाल, 2027 के महासमर में पूर्वांचल के युवा वोट बैंक का रुख किस ओर होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि प्रयागराज से उठी इन आवाजों ने सत्ता के गलियारों में दबाव जरूर बढ़ा दिया है।
*करप्ट एजुकेशन सिस्टम को बोलो 👇
— Congress (@INCIndia) August 8, 2026
Khatam... Tata, Bye-Bye 👋 pic.twitter.com/wuEvUU8HIM
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