दिल्ली से प्रयागराज तक गरमाई यूपी की सियासत: क्या 2027 के लिए हो रही है कोई बड़ी तैयारी?
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन बेहद हलचल भरा रहा। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व के साथ मंथन करते दिखे, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रयागराज में युवाओं के बीच सरकार को घेरने की रणनीति बनाते नजर आए। इन घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

दिल्ली में महाबैठक: सीएम योगी और आलाकमान

मेरठ, बागपत और गाजियाबाद में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा करने के तुरंत बाद सीएम योगी आदित्यनाथ सीधे दिल्ली पहुंचे। 7 लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी उच्चस्तरीय मुलाकात ने सभी का ध्यान खींचा है। पीएम के अलावा सीएम योगी की भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ भी बैठक हुई। बीते कुछ महीनों में गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी लगातार होती मुलाकातें और अब पीएम के साथ यह बैठक किसी बड़े प्रशासनिक या सांगठनिक बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

युवाओं के जरिए आर-पार की रणनीति

प्रयागराज के केपी कॉलेज मैदान में राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अनुमति को लेकर हुए विवाद के बावजूद राहुल ने युवाओं से संवाद साधा। उन्होंने पेपर लीक, महंगी कोचिंग और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को उठाकर सरकार पर सीधा निशाना साधा। प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्र प्रयागराज में राहुल का यह दौरा साफ दर्शाता है कि विपक्ष 2027 के चुनाव में युवा वोट बैंक को अपना मुख्य हथियार बनाना चाहता है।

क्या यूपी में होने वाला है बड़ा बदलाव?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें محض शिष्टाचार नहीं हैं। हाल ही में हुआ यूपी कैबिनेट विस्तार और केंद्रीय नेतृत्व से लगातार संवाद इस बात का प्रमाण है कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने और राज्य में सत्ता विरोधी माहौल को रोकने के लिए प्लान-2027 पर काम कर रही है।

चुनाव की बिसात अभी से तैयार

एक तरफ सीएम योगी का धार्मिक और प्रशासनिक संतुलन साधने का प्रयास है, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी का धरातल पर उतरकर युवाओं को एकजुट करने की कोशिश। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का चुनाव अभी से ही केंद्र में आ चुका है। दिल्ली के बंद कमरों में बनी रणनीति और प्रयागराज की सड़कों पर गूंजता छात्रों का आक्रोश यह साबित करने के लिए काफी है कि यूपी में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

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