गोल्ड जीतकर घर लौटे अंकुश पंघाल: फाउंडेशन से मिली सीख और गुरु का मिला आशीर्वाद
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का परचम लहराने वाले बॉक्सर अंकुश पंघाल ने अपनी जीत के बाद एक भावुक और प्रेरणादायक मुलाकात की। स्वर्ण पदक जीतने के बाद अंकुश ने सीधे अपने गुरु और मार्गदर्शक पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा से भेंट की और उनका आशीर्वाद लिया।

सफलता की नींव: जहां से शुरू हुआ सफर अंकुश पंघाल की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे डॉ. सुभाष चंद्रा फाउंडेशन का बड़ा योगदान रहा है। इसी फाउंडेशन ने अंकुश को बॉक्सिंग की शुरुआती ट्रेनिंग और सही मार्गदर्शन प्रदान किया था। इस खास मुलाकात के दौरान अंकुश के साथ उनके कोच प्रदीप सावंत भी मौजूद थे।

डॉ. सुभाष चंद्रा ने अंकुश की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि अंकुश की यह उपलब्धि न केवल उनके क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरे देश के युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. चंद्रा ने विश्वास जताया कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी अंकुश देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

रिंग में दिखी जबरदस्त फाइटिंग स्पिरिट ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के 80 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में अंकुश का मुकाबला इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू से था। पहले राउंड में पिछड़ने के बावजूद, अंकुश ने अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया। शानदार वापसी करते हुए उन्होंने सटीक पंच जड़े और अंततः 4-1 से मुकाबला जीतकर गोल्ड अपने नाम किया। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की थी।

पिता का संघर्ष और 11 साल का सपना अंकुश के मुक्केबाज बनने की कहानी बेहद संघर्षपूर्ण रही है। हिसार के रहने वाले अंकुश ने साल 2017 में महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग ग्लव्स पहने थे। उनके पिता सुरेश पंघाल ने इस सफर में ढाल बनकर उनका साथ दिया।

सुरेश रोजाना अंकुश को गांव से 15 किलोमीटर दूर कोचिंग सेंटर ले जाते थे। आज पिता का वह समर्पण, फाउंडेशन का मार्गदर्शन और अंकुश की मेहनत रंग लाई है, जिसके दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराया है। स्वदेश लौटने पर अपने गांव भेरिया में भी उनका भव्य स्वागत किया गया था।

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