सैनिक स्कूलों पर वैचारिक कब्जा बनाम तथ्य : रक्षा समिति की बैठक में राहुल गांधी और BJP आमने-सामने
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दिल्ली: रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को उस समय अखाड़ा बन गई जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सैनिक स्कूलों के संचालन को लेकर विवादित दावा पेश किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी संस्थाएं सैनिक स्कूलों पर कब्जा कर रही हैं।

राहुल का आरोप और बीजेपी का पलटवार बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सैनिक स्कूलों में RSS के प्रभाव को बढ़ाया जा रहा है और यह एक गंभीर मुद्दा है। इस पर बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कड़ी आपत्ति जताई। त्रिवेदी ने राहुल गांधी से उन ठोस आधारों और सबूतों की मांग की जिनके दम पर वे यह दावा कर रहे हैं।

समिति में हंगामा और अध्यक्ष का दखल राहुल गांधी के आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति को बिगड़ता देख समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समिति केवल तथ्यों के आधार पर काम करेगी। अध्यक्ष ने राहुल गांधी से कहा कि वे अपने दावे के पक्ष में दस्तावेज पेश करें, जिन्हें जांच के लिए संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा।

PPP मॉडल पर छिड़ा विवाद सूत्रों के अनुसार, बैठक में सैनिक स्कूलों के संचालन के लिए अपनाए गए PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर भी चर्चा हुई। आरोप है कि करीब 70 नए सैनिक स्कूलों का संचालन विद्या भारती और सरस्वती शिशु मंदिर जैसी संस्थाओं को दिया गया है, जिनका संबंध RSS से बताया जाता है। बीजेपी सांसदों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इन संस्थाओं का चयन पारदर्शी तरीके से हुआ है और बिना साक्ष्य के आरोप लगाना उचित नहीं है।

राहुल गांधी ने चुप्पी साधी बैठक के बाद जब पत्रकारों ने राहुल गांधी से अंदर हुई चर्चा के बारे में पूछा, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, मुझे बैठक के अंदर क्या हुआ, यह बताने की अनुमति नहीं है। इसके बाद वे अन्य कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गए।

आगे क्या होगा? फिलहाल मामले को शांत कर दिया गया है। समिति ने यह तय किया है कि सैनिक स्कूलों के संचालन का विवरण और संस्थाओं की सूची की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी इन दावों के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश कर पाते हैं, या यह मुद्दा केवल बयानों तक सीमित रह जाएगा।

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