कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी पर दिल्ली से हरियाणा तक घमासान: मेडल हमारे, तो खेल गुजरात में क्यों?
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2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल गया है। अहमदाबाद को आधिकारिक मेजबान घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे ने दिल्ली की संसद से लेकर हरियाणा की राजनीति तक को गरमा दिया है।

दीपेंद्र हुड्डा का प्रदर्शन और मांग सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा के चार अन्य कांग्रेस सांसदों के साथ संसद के मकर द्वार पर तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। उनका सीधा सवाल है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े खेलों में भारत की झोली में 50 प्रतिशत से ज्यादा मेडल हरियाणा के खिलाड़ी डालते हैं, तो फिर खेलों का आयोजन गुजरात में क्यों किया जा रहा है? हुड्डा की मांग है कि हरियाणा को कम से कम सह-मेजबान (Co-host) तो बनाया ही जाना चाहिए।

बबीता फोगाट का तीखा पलटवार इस मांग पर बीजेपी नेता और पूर्व रेसलर बबीता फोगाट ने जोरदार हमला बोला है। बबीता ने दीपेंद्र हुड्डा के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए उन्हें नकारात्मक राजनीति करने वाला बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, जब 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स हुए, तब यह मांग क्यों नहीं उठी? जब आप 10 साल तक हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे, तब एक नेशनल लेवल का गेम हरियाणा में क्यों नहीं करवा पाए?

बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने बबीता फोगाट के इस बयान के बाद हरियाणा की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। हुड्डा का समर्थन करते हुए हरियाणा महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पीरल चौधरी ने बबीता फोगाट पर पलटवार किया है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या बबीता को हरियाणा के मेजबान बनने से ऐतराज है? क्या वे हरियाणा को इस बड़े अवसर से वंचित रखना चाहती हैं?

क्या है असली विवाद? एक तरफ कांग्रेस इसे हरियाणा के हक की लड़ाई बता रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे विपक्ष का नाटक करार दे रही है। बीजेपी का तर्क है कि ऐसे आयोजन एक राज्य के नहीं, बल्कि पूरे देश के होते हैं। बहरहाल, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के बहाने हरियाणा में आगामी राजनीति के समीकरण फिर से सक्रिय हो गए हैं। अब देखना यह है कि यह दबाव क्या केंद्र सरकार को अपनी रणनीतियों पर विचार करने के लिए मजबूर करेगा या विवाद इसी तरह जारी रहेगा।

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