जुकरबर्ग माफी मांगें, वरना छिन जाएगा सेफ हार्बर का अधिकार : मेटा पर भड़की संसदीय समिति
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने का मामला अब गंभीर राजनीतिक रंग ले चुका है। कम्युनिकेशन और आईटी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने इसे केवल एक तकनीकी चूक मानने से इनकार कर दिया है। समिति ने मेटा के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है।

जुकरबर्ग को सार्वजनिक माफी का अल्टीमेटम

संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो सरकार मेटा को आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाले सेफ हार्बर (सुरक्षा कवच) को वापस लेने पर विचार कर सकती है।

एल्गोरिदम पर उठे गंभीर सवाल

निशिकांत दुबे ने मेटा, X और यूट्यूब के एल्गोरिदम की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया कंपनियां जानबूझकर नए और अनरजिस्टर्ड अकाउंट्स को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों की सामूहिक पहुंच के मुकाबले, एक हालिया एंटी-रिजर्वेशन फोरम की पहुंच असामान्य रूप से तेजी से बढ़ी है, जो कंपनी की नीतिगत मंशा पर संदेह पैदा करती है।

यह तकनीकी नहीं, गंभीर सुरक्षा चूक

समिति का मानना है कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो पांच घंटे तक गायब रहना किसी सामान्य तकनीकी गलती का नतीजा नहीं हो सकता। समिति ने इसे बहुत ही गंभीर मुद्दा बताया है। बैठक में मौजूद सदस्यों का कहना है कि सिर्फ माफी काफी नहीं है, बल्कि इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर भी घेराबंदी

बैठक में केवल प्रधानमंत्री का वीडियो ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल रहे चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। समिति ने आरोप लगाया कि मेटा और अन्य कंपनियां गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय के निर्देशों का पालन करने में लापरवाही बरत रही हैं।

सरकार ने पहले भी जताई थी नाराजगी

गौरतलब है कि 28 जुलाई को प्रधानमंत्री का वीडियो हटने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने पहले ही मेटा को समन जारी किया था। मंत्रालय का मानना है कि कंपनी की ओर से दी गई टेक्निकल एरर की दलील बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है।

आगामी समय में मेटा और अन्य सोशल मीडिया दिग्गजों को संसदीय समिति के समक्ष अपनी कार्यप्रणाली और एल्गोरिदम पर विस्तार से जवाब देना पड़ सकता है।

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