कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास, डेकाथलॉन में मेडल जीतने वाले बने पहले भारतीय
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भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो आने वाले कई वर्षों तक याद रखी जाएगी। तेजस्विन ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर न केवल इस प्रतियोगिता में भारत का खाता खोला, बल्कि खुद को भारतीय खेल इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया।

इतिहास रचने वाले पहले खिलाड़ी यह ऐतिहासिक जीत इसलिए भी खास है क्योंकि तेजस्विन कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में दो अलग-अलग एथलेटिक्स स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने हाई जंप में कांस्य पदक जीता था। 27 वर्षीय तेजस्विन ने 7976 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में ग्रेनाडा के विक्टर लिंडन ने स्वर्ण और कनाडा के डेमियन वॉर्नर ने रजत पदक जीता।

चोट को मात देकर जीता चमत्कारी मेडल जीत के बाद तेजस्विन काफी भावुक नजर आए। उन्होंने खुलासा किया कि प्रतियोगिता से कुछ दिन पहले उन्हें घुटने में गंभीर चोट लगी थी, जिससे उनके खेलने पर ही सवालिया निशान लग गया था। उन्होंने कहा, दो दिन पहले मैं चलने की स्थिति में भी नहीं था। पोडियम पर खड़े होना मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी मेडिकल टीम को दिया, जिन्होंने 48 घंटों की कड़ी मेहनत से उन्हें फिट किया।

कठिन सफर और प्रदर्शन का ब्योरा डेकाथलॉन जैसे थका देने वाले खेल में तेजस्विन ने धैर्य और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। 100 मीटर की दौड़ हो या हाई जंप, तेजस्विन ने हर इवेंट में अंक जुटाए। पहले दिन की समाप्ति पर वे दूसरे स्थान पर थे, लेकिन दूसरे दिन डिस्कस थ्रो और पोल वॉल्ट में हुई कड़ी चुनौती के बाद वे चौथे स्थान पर खिसक गए थे। हालांकि, भाला फेंक और आखिरी 1500 मीटर की दौड़ में दमदार वापसी करते हुए उन्होंने कांस्य पदक पक्का किया।

भविष्य की ओर तेजस्विन की नजरें अपनी तकनीक में सुधार को लेकर तेजस्विन बेहद स्पष्ट हैं। लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक की तैयारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जंप और स्प्रिंट तो मजबूत हैं, लेकिन अब उन्हें टेक्निकल थ्रो और पोल वॉल्ट पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों को कड़ी टक्कर दे सकें।

एक शानदार सफर का पड़ाव तेजस्विन का करियर हमेशा से ही प्रेरणादायक रहा है। अमेरिका की कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई और एनसीएए खिताब जीतने से लेकर, हाई जंप के राष्ट्रीय रिकॉर्ड तक का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है। हाई जंप से डेकाथलॉन की ओर रुख करना और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है। इस जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।

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