क्या है मामला? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो, जिसमें उन्होंने छात्रों को पेपर लीक के मुद्दे पर भरोसा दिलाया था, फेसबुक से अचानक गायब हो गया। वीडियो की जगह संदेश दिखा— यह पोस्ट भारत में उपलब्ध नहीं है । मज़े की बात यह कि मेटा ने इसके पीछे किसी कानूनी आदेश का हवाला दिया, जबकि ऐसा कोई सरकारी आदेश था ही नहीं।
मेटा का तर्क और सरकारी असंतोष विवाद बढ़ता देख मेटा ने सफाई दी कि यह ऑटोमेटेड कंटेंट फिल्टर में आई तकनीकी खराबी थी। हालांकि, सरकार इस दलील से संतुष्ट नहीं है। सवाल यह है कि यदि यह एक तकनीकी ग्लिच था, तो केवल प्रधानमंत्री का वीडियो ही क्यों हटा? बाकी पोस्ट पर इसका असर क्यों नहीं पड़ा? कंपनी ने इस ग्लिच की न तो कोई रिपोर्ट दी और न ही यह स्पष्ट किया कि लीगल रिक्वेस्ट का फर्जी मैसेज कैसे जेनरेट हुआ।
दुष्प्रचार पर मौन, संदेश पर सेंसरशिप हैरानी की बात यह है कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक रील्स, भद्दी भाषा वाले वीडियो और झूठ का अंबार लगा हुआ है, जिसे रोकने में मेटा का सिस्टम पूरी तरह नाकाम रहा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का डीपफेक वीडियो भी इसके प्लेटफॉर्म पर फैलता रहा, लेकिन मेटा के AI ने उसे नहीं रोका। जब देश में पेपर लीक को लेकर तनाव था, तब 400 से अधिक पाकिस्तान-आधारित हैंडल्स भारत में अशांति फैलाने के लिए सक्रिय थे, लेकिन मेटा की सेंसरशिप का निशाना सिर्फ प्रधानमंत्री का वीडियो बना।
भारत से अरबों की कमाई, पर जवाबदेही से दूरी मेटा के लिए भारत सबसे बड़ा बाज़ार है। फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए कंपनी भारत में करोड़ों यूजर्स तक अपनी पहुंच रखती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मेटा ने भारत से विज्ञापनों के जरिए करीब 29,392 करोड़ रुपये की कमाई की। बावजूद इसके, कंपनी का एल्गोरिदम और फैक्ट चेकिंग सिस्टम भारत की संप्रभुता और कानून-व्यवस्था के प्रति लापरवाह बना हुआ है।
संसदीय समिति का सख्त रुख इस पूरे घटनाक्रम के बाद संचार और सूचना तकनीक पर बनी संसदीय समिति ने मेटा, गूगल, एक्स और स्नैपचैट जैसी कंपनियों को समन भेजा है। 3 अगस्त को होने वाली बैठक में इन कंपनियों से ऑनलाइन सुरक्षा और सरकारी नियमों के पालन पर कड़ी पूछताछ की जाएगी।
लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब केवल तकनीक तक सीमित नहीं हैं, वे एजेंडा सेट करने वाले टूल बन चुके हैं। जब कोई निजी कंपनी तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर सरकार और जनता के बीच के संवाद में बाधा डालने लगे, तो यह सीधा प्रहार लोकतंत्र पर है। यह तय करने का अधिकार किसी विदेशी सोशल मीडिया कंपनी को नहीं है कि भारतीय नागरिक अपनी स्क्रीन पर क्या देखेंगे और किस पर भरोसा करेंगे।
#DNAमित्रों | PM के उस वीडियो में क्या था.. जो ब्लॉक हुआ? PM मोदी के खिलाफ मेटा की ब्लॉक पॉलिसी !#DNA #DNAWithRahulSinha #PMModi #Facebook @rahulsinhatv pic.twitter.com/12tCwFP2Io
— Zee News (@ZeeNews) July 28, 2026
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