CWG 2026: भूखी-प्यासी रहीं, रिकॉर्ड तोड़े और स्वर्ण पर कब्जा; मीराबाई चानू के त्याग की कहानी
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मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) में उनका कोई सानी नहीं है। राष्ट्रमंडल खेलों (CWG 2026) में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया है।

दो दिन तक नहीं किया अन्न-जल ग्रहण

जीत के बाद जब मीराबाई पत्रकारों के सामने आईं, तो उनकी पहली मांग थी, जल्दी कीजिए, मैंने दो दिनों से कुछ खाया नहीं है। यह जीत केवल उनके शारीरिक कौशल की नहीं, बल्कि उनके कठोर अनुशासन और त्याग की है। अपना वजन 48 किलोग्राम की श्रेणी में बनाए रखने के लिए उन्होंने पिछले दो दिनों से न कुछ खाया और न ही पानी पिया।

रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन और भावुक पल

मीराबाई ने कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड स्थापित किया। स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाना एक चैंपियन की काबिलियत दर्शाता है। पदक समारोह के दौरान, तिरंगे के रंग की रिबन बांधे हुए जब राष्ट्रगान बज रहा था, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी मां और कोच विजय शर्मा को दिया, जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया।

क्यों नहीं किया आखिरी प्रयास?

मीराबाई ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों में शुरुआती झटके झेले, लेकिन एक सच्ची योद्धा की तरह उन्होंने तुरंत वापसी की। स्वर्ण पदक पक्का होने के बाद उन्होंने अपना तीसरा और अंतिम प्रयास नहीं किया। इसके पीछे का कारण एशियाई खेलों की तैयारी थी। उन्होंने बताया, मेरा सामान्य वजन 50.5 किलोग्राम है। 48 किलोग्राम के वर्ग में फिट रहने के लिए वजन घटाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। हमने कोच के साथ पहले ही निर्णय लिया था कि अनावश्यक जोखिम से बचकर केवल दो-दो प्रयास ही करेंगे ताकि चोट से बचा जा सके।

चैंपियन का जज्बा

अपनी जीत पर बात करते हुए मीराबाई ने कहा कि उन पर परिवार और करोड़ों देशवासियों की उम्मीदों का काफी दबाव था। लेकिन उस दबाव को उन्होंने खुद पर हावी नहीं होने दिया। 48 किलोग्राम वर्ग में खुद को साबित करने के लिए उन्होंने जो कुर्बानी दी, वह किसी भी खिलाड़ी के लिए एक मिसाल है। बिना अन्न-जल के खुद को इस स्तर पर झोंक देना ही मीराबाई को एक लीजेंड बनाता है।

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