अदीना मस्जिद बनाम आदिनाथ मंदिर: बंगाल के मालदा में छिड़ा 653 साल पुराना विवाद
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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद एक बार फिर चर्चा में है। सावन के महीने की शुरुआत के साथ ही इस संरक्षित स्मारक को लेकर तनाव बढ़ गया है। आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति ने घोषणा की है कि वे मस्जिद के निकट स्थित मंदिर में एक विशाल शिवलिंग स्थापित करेंगे, जिससे स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग सतर्क हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ मंदिर समिति का यह दावा है कि वर्तमान अदीना मस्जिद जिस स्थान पर स्थित है, वहां मूल रूप से आदिनाथ शिव मंदिर था। समिति ने ऐलान किया है कि सावन के दौरान हुगली के तारकेश्वर से लाया गया 3.6 फीट ऊंचा और डेढ़ टन वजनी शिवलिंग, मस्जिद से 50 मीटर दूर स्थित मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

कानून का पालन या शक्ति प्रदर्शन?

समिति का कहना है कि वे किसी तरह की अवैध गतिविधि नहीं करेंगे। उनके संरक्षक और स्थानीय भाजपा नेता काजल गोस्वामी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में वे अदालत के माध्यम से अनुमति लेकर संरक्षित स्मारक (मस्जिद परिसर) के भीतर भी शिवलिंग स्थापित करने का प्रयास करेंगे। उनका आरोप है कि मस्जिद के निर्माण के लिए प्राचीन हिंदू और बौद्ध ढांचे को ध्वस्त किया गया था।

एएसआई का रुख और पुलिस की चेतावनी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रिकॉर्ड के अनुसार, अदीना मस्जिद का निर्माण 1373 ईस्वी में सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था। यह स्मारक प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित है।

इस स्थिति को देखते हुए मालदा पुलिस ने सख्त एडवाइजरी जारी की है। पुलिस का कहना है कि संरक्षित परिसर के भीतर बिना अनुमति कोई भी धार्मिक आयोजन या ढांचे में बदलाव करना कानून का उल्लंघन है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीति और अदालती दांव-पेच

यह मामला पिछले साल सांसद यूसुफ पठान के दौरे के बाद राजनीतिक रूप से और गहरा गया। भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने संसद में भी यह मुद्दा उठाया था और दावा किया था कि मस्जिद का निर्माण हिंदू-बौद्ध प्रतीकों और सामग्रियों का उपयोग करके किया गया है। इसके अलावा, कलकत्ता उच्च न्यायालय में भी एक जनहित याचिका दायर की जा चुकी है, जिसमें एएसआई द्वारा स्मारक की गलत पहचान का आरोप लगाया गया है।

वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण

मालदा से 16 किमी दूर पांडुआ में स्थित अदीना मस्जिद 14वीं सदी की इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। कभी 387 गुंबदों और 260 खंभों वाली यह विशाल इमारत अब एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल है। 653 साल पुराने इस इतिहास और वर्तमान धार्मिक दावों के बीच, स्थानीय प्रशासन के लिए शांति व्यवस्था बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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