रूसी हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत पर भारत सख्त, मॉस्को को जारी किया कड़ा संदेश
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नई दिल्ली: मर्चेंट नेवी के कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों में दो अलग-अलग सैन्य हमलों में 7 भारतीय नाविकों ने अपनी जान गंवाई है। हाल ही में यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास रूसी मिसाइल हमले में 4 भारतीयों की मौत के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए रूसी राजनयिक को तलब किया है।

ओडेसा में रूसी क्रूज मिसाइल का कहर

रविवार शाम यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से मक्के की खेप लेकर निकला मालवाहक जहाज एमवी गोल्डन लियो रूसी क्रूज मिसाइलों का शिकार हो गया। इस जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय थे। इस दुखद हमले में 4 भारतीयों की मौत हो गई, जबकि एक भारतीय नाविक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। रूसी-यूक्रेन संघर्ष के बीच कमर्शियल जहाजों पर हुए इस हमले ने वैश्विक स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है।

कासरगोड का अखिल और टूटते सपने

जान गंवाने वाले नाविकों में केरल के कासरगोड जिले का 26 वर्षीय अखिल जोयन भी शामिल है। अखिल अपने परिवार की इकलौती उम्मीद थे। मात्र 19 साल की उम्र में मर्चेंट नेवी जॉइन करने वाले अखिल की दो महीने बाद शादी होने वाली थी। तीन महीने पहले ही वह अपनी सगाई के लिए घर आए थे। शिपिंग कंपनी के एक ईमेल ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।

अमेरिका ने भी नहीं जताया खेद

सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि पिछले हफ्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भी 3 भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। ईरान के खिलाफ नाकेबंदी के दौरान अमेरिका ने एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस घटना के लिए माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया और इस कार्रवाई को सही ठहराया।

भारत की दो टूक: यह निंदनीय है

इस घटनाक्रम के बाद भारत ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और निर्दोष नाविकों की जान खतरे में डालना पूरी तरह से निंदनीय है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जहाजरानी और वैश्विक व्यापार की आजादी में बाधा डालना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

सरकार क्या कर रही है?

यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। घायल भारतीय नाविक को हरसंभव चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष के साथ बात कर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। फिलहाल, भारत सरकार पीड़ित परिवारों के साथ संपर्क में है और मृतकों के शवों को स्वदेश लाने की प्रक्रिया पर काम कर रही है।

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