आरएमएल अस्पताल बना सियासी अखाड़ा: राहुल गांधी ने की मोदी-शाह के इस्तीफे की मांग
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दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में मंगलवार रात का सन्नाटा उस समय भंग हो गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल के साथ अचानक घायलों से मिलने पहुंचे। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प में घायल छात्रों की स्थिति देखकर राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला।

युवाओं के भविष्य का अंधकार

अस्पताल से बाहर निकलते ही राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का संकट है। युवाओं के सामने सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। जो एकमात्र दरवाजा प्रतियोगी परीक्षाओं का खुला था, उसे भी पेपर लीक और धांधली के जरिए पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।

तीन दिग्गजों के इस्तीफे की हुंकार

घायलों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग की। राहुल ने कहा कि इस बर्बरता और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ के लिए इन तीनों नेताओं को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

आरएसएस और कॉरपोरेट्स पर निशाना

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस के हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उन्होंने उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी का नाम लेते हुए कहा कि शिक्षा से लेकर व्यापार तक के पूरे सिस्टम पर कुछ चुनिंदा लोगों ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने कटाक्ष किया कि एक तरफ युवा 1,000 करोड़ रुपये की शादियां देख रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके पास अपना भविष्य सवांरने के लिए कोई साधन नहीं है।

सियासी कुरुक्षेत्र: जनरल डायर से तुलना

विवाद तब और गहरा गया जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पुलिस कार्रवाई की तुलना जलियांवाला बाग कांड से करते हुए सरकार को जनरल डायर करार दिया। इस चौतरफा हमले के बीच, डैमेज कंट्रोल के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी आरएमएल अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों के साथ आपातकालीन बैठक की।

आंकड़ों पर आमने-सामने

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस झड़प में 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेड तोड़ने के प्रयासों के चलते उन्हें बल प्रयोग करना पड़ा। वहीं, विपक्ष ने इसे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग और उनकी आवाज दबाने की साजिश करार दिया है।

अब अस्पताल के गलियारों से शुरू हुआ यह तनाव संसद के भीतर भी जोर पकड़ रहा है। क्या यह सरकार के लिए किसी बड़े संकट की शुरुआत है? आने वाला समय ही बताएगा कि क्या इस मामले में वास्तव में कोई ठोस जवाबदेही तय की जाएगी।

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