सिक्किम टनल हादसा: 21 साल, 8,449 करोड़ का बजट, फिर भी मौतें क्यों?
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सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना की एक टनल में हुए हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हादसे में अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। यह टनल सामरदुंग-झोलुंगेय क्षेत्र में स्थित है, जहाँ राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।

21 साल का लंबा इंतजार और अधूरी हकीकत

यह प्रोजेक्ट वर्ष 2005 में शुरू हुआ था, जिसे 2012 तक पूरा होना था। हालांकि, वित्तीय संकट, 2011 का विनाशकारी भूकंप और भूगर्भीय बाधाओं के कारण काम ठप पड़ गया। 2019 में एनएचपीसी (NHPC) ने इस परियोजना को अपने हाथों में लिया, लेकिन तब तक निर्माण का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो पाया था।

बजट का बढ़ता बोझ

परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत 5,748 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 8,449 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। देरी और हिमालयी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब इसे सितंबर 2029 तक पूरा करने का नया लक्ष्य रखा गया है।

क्या है यह जलविद्युत परियोजना?

यह 500 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। इसमें तीस्ता नदी के प्रवाह का उपयोग कर बिजली बनाई जाएगी। परियोजना में दो विशाल हेड रेस टनल (प्रत्येक 13.76 किमी लंबी) शामिल हैं, जिनके जरिए पानी भूमिगत पावर हाउस तक पहुँचाया जाएगा। पूरा होने पर यह परियोजना प्रति वर्ष 2,400 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम होगी।

हादसे की भयावहता: गैस रिसाव बना बड़ी चुनौती

सोमवार, 20 जुलाई को हुई भारी बारिश के कारण टनल के मुहाने पर मलबा गिर गया, जिससे रास्ता बंद हो गया। लेकिन, बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के अंदर मौजूद जहरीली गैस बनी। कुछ बचाव कर्मियों को अंदर जाने पर चक्कर और बेहोशी की शिकायत हुई, जिससे पता चला कि जमीन की परतों से खतरनाक गैसें निकल रही हैं।

सुरक्षा के गंभीर सवाल

हिमालयी राज्यों में निर्माण करना हमेशा से एक जोखिम भरा काम रहा है। भूस्खलन, कमजोर चट्टानें और अनपेक्षित गैस रिसाव जैसे खतरे निर्माण स्थलों पर हर पल मौत को दावत देते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि परियोजनाओं की गति बढ़ाने के बजाय, मजदूरों की सुरक्षा और नियमित भूगर्भीय जांच को सबसे अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

फिलहाल, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें जान जोखिम में डालकर अंतिम फंसे हुए व्यक्तियों तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन यह हादसा सिस्टम से नीति-निर्माताओं तक कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ गया है।

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