फुटबॉल नहीं ये जंग है: अर्जेंटीना-इंग्लैंड मैच से फिर क्यों ताजा हुए फॉकलैंड युद्ध के जख्म?
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अर्जेंटीना की जीत का जुनून और माल्विनास का जिक्र मेसी की अर्जेंटीना ने जब स्विट्जरलैंड को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया, तो ड्रेसिंग रूम में टीम ने अपने अनौपचारिक वर्ल्ड कप गीत द फोर्थ स्टार के साथ जश्न मनाया। इस दौरान खिलाड़ियों ने माल्विनास के लिए, डिएगो के लिए के नारे लगाए। यह महज एक जश्न नहीं, बल्कि अर्जेंटीना के उस गहरे घाव को दर्शाता है जो 1982 के फॉकलैंड युद्ध और डिएगो माराडोना की विरासत से जुड़ा है।

इतिहास और भावनाएं: 1982 का युद्ध और 1986 का बदला साल 1982 में दक्षिण अटलांटिक में फॉकलैंड द्वीप (जिसे अर्जेंटीना माल्विनास कहता है) को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच 74 दिनों तक युद्ध हुआ था, जिसमें दोनों तरफ के सैकड़ों सैनिक मारे गए थे। ठीक चार साल बाद 1986 वर्ल्ड कप में जब दोनों टीमें टकराईं, तो डिएगो माराडोना के हैंड ऑफ गॉड गोल ने इस खेल को फुटबॉल से ऊपर उठाकर एक राष्ट्रीय प्रतिशोध की तरह पेश किया। आज चार दशक बाद भी यह मुकाबला सिर्फ 90 मिनट का खेल नहीं रह गया है।

हैंड ऑफ गॉड का कालातीत जादू 1986 के उस क्वार्टरफाइनल में माराडोना ने दो ऐसे गोल किए जो इतिहास में दर्ज हो गए। पहला, हाथ से किया गया विवादास्पद हैंड ऑफ गॉड और दूसरा, इंग्लैंड के पांच खिलाड़ियों को छकाकर किया गया गोल ऑफ द सेंचुरी । अर्जेंटीना के लिए वह जीत सिर्फ सेमीफाइनल में पहुंचना नहीं थी, बल्कि युद्ध में मिली हार का भावनात्मक मरहम थी। आज सेमीफाइनल से पहले अर्जेंटीना में फिर वही पुराना जोश और यादें जीवित हो उठी हैं।

विवाद की जड़: माल्विनास किसका? अर्जेंटीना का दावा है कि माल्विनास उसके भौगोलिक क्षेत्र का हिस्सा है जिसे ब्रिटेन ने 1833 में अवैध रूप से कब्जाया था। वहीं, ब्रिटेन का कहना है कि 1982 की सैन्य कार्रवाई द्वीपों की सुरक्षा के लिए जरूरी थी और वहां के निवासी खुद को ब्रिटिश मानते हैं। 2013 के जनमत संग्रह में भी वहां की जनता ने ब्रिटेन के साथ रहने का समर्थन किया था। यही विरोधाभास इस फुटबॉल मैच को एक कूटनीतिक तनातनी में बदल देता है।

मैदान के बाहर भी सियासत का शोर अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई का ब्रिटेन की पूर्व पीएम मार्गरेट थैचर के प्रति झुकाव वहां घरेलू राजनीति के लिए बड़ा विवाद रहा है। वहीं, इंग्लैंड में पूर्व फुटबॉलर गैरी लिनेकर द्वारा पॉडकास्ट में माल्विनास शब्द का इस्तेमाल करने पर भी वहां के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस ने स्पष्ट किया है कि वे इसे महज एक फुटबॉल मैच की तरह देखना चाहते हैं, लेकिन इतिहास और राजनीति का दबाव साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है।

बुधवार की रात, जब मेसी की टीम इंग्लैंड के खिलाफ उतरेगी, तो मैदान पर सिर्फ फुटबॉल नहीं, बल्कि दशकों पुरानी यादें, घाव और करोड़ों लोगों की उम्मीदें एक साथ खेल रही होंगी।

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