दुनिया के सबसे अच्छे वकील लेकर आएं , शेख हसीना की वापसी पर बांग्लादेश का बड़ा चैलेंज
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ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के स्वदेश लौटने के ऐलान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। तारिक रहमान के सलाहकार जाहिद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि सरकार हसीना की वापसी का स्वागत करती है, लेकिन उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन वकीलों के साथ आना चाहिए ताकि वे कोर्ट का सामना कर सकें।

न्याय के लिए तैयार है सरकार जाहिद उर रहमान ने स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि हसीना के खिलाफ चल रहे मुकदमों में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। उनका कहना है कि बांग्लादेश की जनता चाहती है कि उनके अपराधों के लिए आईसीटी (ICT) द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को अंजाम तक पहुँचाया जाए। सरकार इस पूरी प्रक्रिया में न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पारदर्शी सुनवाई का वादा सरकार ने दावा किया है कि शेख हसीना के मुकदमे की सुनवाई बेहद पारदर्शी होगी। जाहिद के अनुसार, सुनवाई के दौरान अंतरराष्ट्रीय ऑब्जर्वर मौजूद रह सकेंगे और पूरी कार्यवाही की वीडियो कवरेज भी जारी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर कोर्ट उनके खिलाफ पहले आए फैसले पर पुनर्विचार करने पर भी खुला है।

प्रत्यर्पण और गिरफ्तारी का पेंच भले ही सरकार वापसी का स्वागत कर रही है, लेकिन कानूनी राह आसान नहीं है। आईसीटी के चीफ प्रॉसिक्यूटर अमीनुल इस्लाम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि हसीना प्रत्यर्पण संधि के तहत वापस आती हैं, तो उन्हें सीधा जेल भेजा जाएगा। उन्हें अदालत में सरेंडर करने का मौका नहीं मिलेगा।

सत्ता से निर्वासन तक का सफर अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से ही वे भारत में रह रही हैं। पिछले साल नवंबर में एक स्पेशल ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी।

हसीना के लिए बदली परिस्थितियां करीब 20 साल तक बांग्लादेश की सत्ता संभालने वालीं शेख हसीना के लिए अब स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उनकी पार्टी अवामी लीग को देश में प्रतिबंधित कर दिया गया है और उनके खिलाफ कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। हसीना ने अपने खिलाफ आए फैसलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए सिरे से खारिज किया है।

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