नागपुर: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने पार्टी छोड़ने वाले छह बागी सांसदों को लेकर तीखे तेवर अपनाए हैं। राउत ने दावा किया कि इन सभी बागी नेताओं का राजनीतिक भविष्य अंधकार में है और उनकी सदस्यता रद्द होना तय है।
कानूनी शिकंजे में बागी राउत ने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी इन बागी सांसदों के खिलाफ कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ रही है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, मेरी बात याद रखिए, ये नेता न घर के रहेंगे और न घाट के। इनका राजनीतिक तौर पर टिके रहना अब आसान नहीं होगा।
स्पीकर की भूमिका पर सवाल संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए बागी सांसदों के पत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक मूल राजनीतिक दल औपचारिक रूप से विलय का फैसला नहीं लेता, तब तक अलग हुए सांसदों को अध्यक्ष के सामने विलय की इच्छा जताने का कोई अधिकार नहीं है।
राउत के अनुसार, संविधान की दसवीं अनुसूची में ऐसी स्थिति का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए, बागी सांसदों का कानूनी दावा कमजोर है और उनके खिलाफ कार्रवाई होना निश्चित है।
2022 से जारी है कलह बता दें कि शिवसेना में यह राजनीतिक संकट 2022 में शुरू हुआ था, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था। इसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया, जिसके बाद उद्धव गुट को शिवसेना (यूबीटी) के रूप में नई पहचान मिली।
महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल संजय राउत के इस बयान ने महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। यदि बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो इसके गंभीर परिणाम लोकसभा की राजनीति और राज्य के समीकरणों पर पड़ सकते हैं। फिलहाल, अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं।
*#WATCH | Nagpur, Maharashtra: Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, We are currently engaged in a legal battle regarding this. It will not be easy for the six individuals who defected to survive politically; their membership is set to be cancelled. Mark my words, they will end up… pic.twitter.com/Ds5KExzOAd
— ANI (@ANI) July 14, 2026
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