राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: ट्रस्ट ने चंपत राय-अनिल मिश्रा के नाम हटाए, अब सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्र, यूपी सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर SIT की रिपोर्ट तलब की है। इस बीच, मंदिर ट्रस्ट ने अपनी साख बचाने के लिए बड़े प्रशासनिक फेरबदल शुरू कर दिए हैं।

वेबसाइट से हटाए गए नाम, VIP पास भी ब्लॉक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अपनी आधिकारिक वेबसाइट से पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम हटा दिया है। इन दोनों नेताओं के इस्तीफे पहले ही स्वीकार किए जा चुके थे, लेकिन अब उनके VIP पास भी ब्लॉक कर दिए गए हैं। ट्रस्ट का यह कदम राम भक्तों के बीच बनी शंकाओं को दूर करने की एक कोशिश माना जा रहा है।

क्या है घोटाले की टाइमलाइन? मामले का खुलासा 7 जून 2026 को तब हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चंदे में हेराफेरी का आरोप लगाया। इसके बाद योगी सरकार ने SIT का गठन किया। 25 जून को दर्ज FIR के बाद अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब 80 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई है। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

पहली बार CEO की तलाश, क्या होंगी शक्तियां? चोरी कांड के बाद ट्रस्ट ने पहली बार चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के पद के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 18 जुलाई है।

ब्रजभूषण शरण सिंह का पल्ला झाड़ा इस पूरे प्रकरण पर भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह की चुप्पी और उनके बयान सुर्खियों में हैं। जब उनसे निष्पक्ष जांच के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, यह हमारा विषय नहीं है। हम या जनता इसमें कुछ नहीं कर सकते। जो जांच कर रहे हैं, वही करेंगे। इससे पहले भी वे संकेत दे चुके हैं कि इस मामले में बड़े लोग शामिल हैं, जिसके चलते वे खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

आरोपियों के लिए नई व्यवस्था दिलचस्प बात यह है कि फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों का केस लड़ने से मना कर दिया था। इसके बाद यूपी सरकार ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुलशेखर सिंह को लीगल एड डिफेंस काउंसिल नियुक्त किया है, जो स्थानीय बार के सदस्य नहीं हैं। स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट ने सभी 8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 27 जुलाई तक बढ़ा दी है।

अब सबकी निगाहें 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं, जहां नए CEO की नियुक्ति और मंदिर प्रशासन के भविष्य पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

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