कार में पानी भी न छलकेगा! जानिए 30 मिनट में लखनऊ से कानपुर पहुंचाने वाले एक्सप्रेसवे की 3D तकनीक
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लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर अब महज एक याद बनकर रह जाएगा। जल्द ही शुरू होने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे न केवल दोनों शहरों की दूरी को 45 मिनट के भीतर समेट देगा, बल्कि यात्रा के अनुभव को भी पूरी तरह बदल देगा। यह उत्तर प्रदेश का पहला बैरियर-फ्री 6-लेन एक्सप्रेसवे है, जो अपनी इंजीनियरिंग के दम पर देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

30 फीसदी हिस्सा हवा में 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खूबी इसका 3D एलीवेटेड डिजाइन है। इस पूरे प्रोजेक्ट का लगभग 19 किलोमीटर (करीब 30 प्रतिशत) हिस्सा पिलर पर टिका हुआ है। आम एक्सप्रेसवे के विपरीत, जो जमीन पर बनते हैं, इसमें घनी आबादी वाले इलाकों को हवा में पार किया जाएगा, जिससे सफर के दौरान ट्रैफिक का कोई नामोनिशान नहीं होगा।

क्या है 3D ऑटोमेट मशीन गाइडेंस? इस एक्सप्रेसवे की फिनिशिंग इतनी सटीक है कि हाई-स्पीड पर चलते हुए भी आपकी कार में पानी का गिलास हिलना भी मुश्किल होगा। इसका श्रेय जाता है 3D ऑटोमेट मशीन गाइडेंस टेक्नोलॉजी को। इसमें कंक्रीट बिछाने वाली मशीनों को सीधे जीपीएस और 3D डिजिटल मॉडल से जोड़ा गया है। इससे मानवीय गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है और सड़क को एक स्मूथ और सटीक फिनिश मिलती है।

सीधे एयरपोर्ट के रनवे तक पहुंच यह एक्सप्रेसवे आधुनिक कनेक्टिविटी का बेजोड़ नमूना है। यह लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठीक बगल से गुजरता है। इसमें एक विशेष रैंप दिया गया है, जिससे कानपुर या उन्नाव से आने वाले यात्री बिना शहर के ट्रैफिक में उलझे सीधे एयरपोर्ट टर्मिनल तक पहुंच सकेंगे।

डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी रफ्तार यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के दोनों प्रमुख केंद्रों, लखनऊ और कानपुर को एक सीधी रेखा में जोड़ता है। इससे मिलिट्री कार्गो और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। इसके अलावा, उन्नाव के पास रेलवे लाइनों को पार करने के लिए विशेष बोस्ट्रिंग गर्डर्स का उपयोग किया गया है, ताकि रेल यातायात बाधित न हो और निर्माण भी समय पर पूरा हो सके।

बदलेगी दोनों शहरों की तस्वीर वर्तमान में लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रा करने में जाम के कारण 2 से 3 घंटे का समय लग जाता है। यह एक्सप्रेसवे न केवल समय की भारी बचत करेगा, बल्कि आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और ग्रीन बेल्ट के साथ पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखेगा। यह इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल दो शहरों को जोड़ रहा है, बल्कि विकास की नई गति भी तय कर रहा है।

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