FIFA World Cup 2026: क्या इंग्लैंड-अर्जेंटीना के बीच है रेफरी का संकट ? जानिए फीफा के ये सख्त नियम
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फुटबॉल के सबसे बड़े महाकुंभ, फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड और अर्जेंटीना की टीमें एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, इस बार चर्चा केवल उनके शानदार खेल की नहीं, बल्कि रेफरी की नियुक्ति को लेकर बने नो-गो जोन की है। फीफा ने इन दोनों देशों के बीच उपजे ऐतिहासिक तनाव को देखते हुए विशेष रेफरी प्रोटोकॉल लागू किया है।

क्यों है रेफरी की तैनाती पर पाबंदी?

इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच दशकों पुराना फॉकलैंड द्वीप (जिसे अर्जेंटीना में इस्लास माल्विनास कहा जाता है) का विवाद आज भी कायम है। 1982 में इन द्वीपों को लेकर दोनों देशों के बीच 74 दिनों तक हिंसक युद्ध हुआ था। यद्यपि ब्रिटेन ने इन पर दोबारा कब्जा कर लिया, लेकिन अर्जेंटीना आज भी इन पर अपना दावा करता है। इस संवेदनशील इतिहास को देखते हुए फीफा ने यह सुनिश्चित किया है कि मैचों के दौरान किसी भी तरह के हितों के टकराव (Conflict of Interest) की गुंजाइश न रहे।

फीफा का स्पष्ट रुख

फीफा के नियमों के अनुसार, किसी भी रेफरी को अपने देश के मैच में जगह नहीं दी जाती। लेकिन इंग्लैंड और अर्जेंटीना के मामले में फीफा और अधिक सतर्क है। माइकल ओलिवर और एंथनी टेलर जैसे दिग्गज इंग्लिश रेफरी को अर्जेंटीना के मैचों से दूर रखा गया है। ठीक इसी तरह, अर्जेंटीना के रेफरी फाकुंडो टेलो को भी इंग्लैंड के मुकाबलों में जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

कैसे तय होती है नियुक्ति?

रेफरी चयन समिति, जिसका नेतृत्व महान पियरलुइजी कोलिना कर रहे हैं, रेफरी के प्रदर्शन और फिटनेस के अलावा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को भी प्राथमिकता देती है। लक्ष्य सीधा है—मैदान पर खेल की ईमानदारी पर किसी भी राजनीतिक साये का असर न पड़े। यह नीति केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों के बीच भी फीफा समान सावधानी बरतता है।

सेमीफाइनल में भी नजर नहीं आएंगे ये रेफरी

बुधवार को होने वाले इंग्लैंड और अर्जेंटीना के सेमीफाइनल मैच में यह नियम सख्ती से लागू रहेगा। दोनों देशों का कोई भी अधिकारी इस हाई-वोल्टेज मुकाबले की कमान नहीं संभालेगा। दोनों देशों के रेफरी को केवल स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले सेमीफाइनल मैच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

फीफा की इस निष्पक्षता नीति ने यह सुनिश्चित किया है कि करोड़ों दर्शकों के लिए फुटबॉल का यह खेल केवल कौशल और रणनीति के दम पर ही जीता जाए, न कि किसी रेफरी के विवादास्पद फैसले से।

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