गौतम गंभीर का कोचिंग काल : ऐतिहासिक खिताबी जीत और शर्मनाक हार का मिला-जुला सफर
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भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर के 2 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान टीम इंडिया ने जहां आईसीसी की बड़ी ट्रॉफियां जीतकर वर्ल्ड क्रिकेट में अपना दबदबा बनाया, वहीं कई ऐसे शर्मनाक रिकॉर्ड भी बने जिन्होंने भारतीय फैंस को निराश किया। आइए जानते हैं गंभीर के कार्यकाल का पूरा कच्चा-चिट्ठा।

ऊंचाइयों पर टीम इंडिया: हैट्रिक ट्रॉफियों का सुनहरा दौर

गंभीर की आक्रामक रणनीति और युवा खिलाड़ियों पर भरोसे ने टीम इंडिया को शानदार सफलता दिलाई। 2025 में टीम ने न्यूजीलैंड को हराकर ICC चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया। इसी साल पाकिस्तान को मात देकर एशिया कप का खिताब भी भारत के नाम रहा। वहीं, 2026 में टी20 वर्ल्ड कप जीतकर भारत ने लगातार दूसरी बार विश्व विजेता बनने का इतिहास रचा।

घरेलू मैदानों पर बिखरा विजय रथ

गंभीर के कार्यकाल में घरेलू सरजमीं पर भारत का किला कई बार दरका। न्यूजीलैंड के खिलाफ 12 साल बाद घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाना और 0-3 से क्लीन स्वीप होना एक बड़ा झटका रहा। बेंगलुरु टेस्ट में टीम इंडिया महज 46 रनों पर ढेर हो गई थी। इसके अलावा, 15 साल बाद दक्षिण अफ्रीका के हाथों टेस्ट सीरीज में शिकस्त और न्यूजीलैंड से पहली बार घरेलू वनडे सीरीज हारना भी गंभीर के लिए चिंता का विषय रहा।

विदेशी दौरों की कड़वी यादें

विदेशी धरती पर भी गंभीर की कोचिंग में भारत को कई शर्मनाक रिकॉर्ड्स का सामना करना पड़ा। आयरलैंड दौरे पर पहली बार टी20 सीरीज हारना और क्लीन स्वीप होना किसी सदमे से कम नहीं था। वहीं, इंग्लैंड दौरे पर 12 साल बाद टी20 सीरीज में करारी हार मिली। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी 10 साल बाद ऑस्ट्रेलिया से सीरीज हारना भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा उलटफेर साबित हुआ।

वनडे क्रिकेट में सूखा और शर्मनाक आंकड़े

साल 2024 भारतीय वनडे क्रिकेट के लिए बेहद निराशाजनक रहा। 45 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि टीम इंडिया पूरे कैलेंडर ईयर में एक भी वनडे मैच नहीं जीत पाई। हालांकि, इस दौरान टीम ने केवल 3 वनडे खेले थे, जो सभी श्रीलंका के खिलाफ थे और तीनों में ही भारतीय टीम को हार का मुंह देखना पड़ा। श्रीलंका के खिलाफ द्विपक्षीय वनडे सीरीज हारने का सिलसिला 27 साल बाद टूटा, जो एक नया शर्मनाक अध्याय बन गया।

निष्कर्ष: क्या गंभीर की रणनीति सवालों के घेरे में है?

गंभीर का कार्यकाल विरोधाभासों से भरा रहा है। एक तरफ उन्होंने भारत को तीन बड़ी ट्रॉफियां दिलाईं, तो दूसरी तरफ घरेलू मैदान पर टीम की कमजोरी और लगातार सीरीज हार ने टीम के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि गंभीर आने वाले समय में इन हारों से सीखकर टीम को कैसे दिशा देते हैं।

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