हैंड ऑफ गॉड का बदला? कैमरे की केबल से टकराई गेंद बनी इंग्लैंड की जीत का जरिया
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मियामी गार्डन्स: फुटबॉल इतिहास में 40 साल पहले इंग्लैंड के लिए हैंड ऑफ गॉड एक बुरे सपने जैसा था। लेकिन शनिवार को नॉर्वे के खिलाफ विश्व कप क्वार्टर फाइनल में किस्मत ने पलटी मारी और कैमरे की एक केबल इंग्लैंड के लिए वरदान साबित हुई।

मैच का टर्निंग पॉइंट पहले हाफ में इंग्लैंड की टीम 0-1 से पिछड़ रही थी। इंजरी टाइम में नॉर्वे के गोलकीपर ओरजान नाइलैंड ने एक किक मारी, जो ऊपर लटकी हुई कैमरे की केबल से टकरा गई। दिशा बदलते ही गेंद इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम के पास पहुंची, जिन्होंने शानदार गोल कर स्कोर बराबर कर दिया। अंततः इंग्लैंड ने यह मुकाबला 2-1 से अपने नाम किया।

विवाद और रेफरी पर सवाल गोल के तुरंत बाद मैदान पर तनाव बढ़ गया। नॉर्वे के गोलकीपर नाइलैंड, स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड और कोच स्टाले सोलबक्केन ने रेफरी क्लेमेंट टर्पिन से तीखी बहस की। उनका दावा था कि केबल से टकराने के कारण खेल नियमों के विपरीत हुआ।

क्या कहते हैं नियम? फुटबॉल के नियमों के अनुसार, यदि गेंद खेल के दौरान किसी बाहरी वस्तु (जैसे कैमरे की केबल) से टकराती है, तो खेल तुरंत रोक दिया जाना चाहिए था। इसके बाद गेंद किस टीम के पास थी, यह तय करने के लिए ड्रॉप बॉल का सहारा लिया जाना चाहिए था। हालांकि, रेफरी ने खेल नहीं रोका।

VAR सिस्टम पर उठे सवाल इस मैच में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की भूमिका जेरोम ब्रिसार्ड निभा रहे थे। ब्रिसार्ड का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले अर्जेंटीना और मिस्र के मैच में भी उनके फैसलों पर सवाल उठे थे, जहां मिस्र का एक गोल VAR के माध्यम से फाउल करार देकर रद्द कर दिया गया था। अब इस मैच में भी केबल वाली घटना पर VAR की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।

इतिहास की एक याद यह घटना 1986 के विश्व कप की उस कुख्यात घटना की याद दिला गई, जब डिएगो माराडोना ने हैंड ऑफ गॉड (हाथ से गेंद छूकर) गोल किया था। तब रेफरी के उस फैसले से इंग्लैंड विश्व कप से बाहर हो गया था। अब चार दशक बाद, एक तकनीकी भूल ने खेल के परिणाम को पूरी तरह बदल दिया है, जिसने फुटबॉल प्रेमियों को एक नई बहस के लिए मजबूर कर दिया है।

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