#DNA विश्लेषण: गैंगस्टर लॉरेंस के बहाने भारत को घेरने की अमेरिकी साजिश ? FBI की चार्जशीट में छिपे खतरनाक संकेत
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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का आपराधिक साम्राज्य अब अमेरिकी जांच एजेंसियों के निशाने पर है। FBI ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत कैलिफोर्निया की अदालत में 44 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इसमें लॉरेंस के अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क की पूरी कुंडली खोलकर रख दी गई है। लेकिन इस कार्रवाई के पीछे की टाइमिंग और चार्जशीट की शब्दावली कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

क्या लॉबी के हाथों में है अमेरिकी जांच का रिमोट?

सवाल यह है कि क्या अमेरिका में बैठी एक खास भारत-विरोधी लॉबी, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को हथियार बनाकर भारत की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है? लंबे समय से मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के नाम पर भारत को कठघरे में खड़ा करने वाली यह लॉबी अब कानूनी दस्तावेजों की आड़ लेकर एक नया नैरेटिव बुन रही है।

आतंकी निज्जर को धार्मिक नेता बताने पर विवाद

FBI की चार्जशीट में लॉरेंस गैंग के अपराधों की फेहरिस्त में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मामला प्रमुखता से शामिल है। गौरतलब है कि निज्जर भारत सरकार द्वारा घोषित एक आतंकी था, जिस पर हथियारों की तस्करी और आतंकी ट्रेनिंग कैंप चलाने जैसे गंभीर आरोप थे।

हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी एजेंसियां चार्जशीट में निज्जर को आतंकी के बजाय धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में पेश कर रही हैं। इसे भारत विरोधी नैरेटिव को आगे बढ़ाने की एक सोची-समझी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, ताकि परोक्ष रूप से भारत पर सवाल उठाए जा सकें।

पुराना इतिहास और आज की सक्रियता

1980 और 90 के दशक में भी पंजाब में अलगाववाद को हवा देने के लिए अमेरिकी सत्ता तंत्र के एक वर्ग पर पाकिस्तान की ISI का समर्थन करने के आरोप लगते रहे हैं। आज गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे भारत विरोधी तत्व खुलेआम अमेरिका में बैठकर गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। अब FBI का लॉरेंस मामले में अचानक ओवरएक्टिव होना और निज्जर हत्याकांड को केंद्र में लाना इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

कानून की आड़ में भारत पर दबाव?

लॉरेंस बिश्नोई का अपराधी होना निर्विवाद है और उसे भारतीय कानून के तहत सख्त सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, लॉरेंस की आड़ में किसी आतंकी का महिमामंडन करना और उसे पीड़ित के रूप में पेश करना भारत की संप्रभुता को चुनौती देने जैसा है। अपराध और अलगाववाद के बीच की लकीर को धुंधला कर अमेरिकी एजेंसियां आखिर क्या संदेश देना चाहती हैं?

दोहरी चाल: एक तरफ जेल में वीआईपी मांग

इसी बीच, भारत की जेल में बंद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वॉन डाइक ने याचिका दायर कर फाइव स्टार सुविधाओं की मांग की है। खुद को भाड़े का सैनिक बताने वाला यह कैदी तिहाड़ जेल के सामान्य मैन्यू के बजाय अपनी पसंद का खाना और सुविधाएं चाहता है।

एक तरफ अमेरिकी एजेंसियां भारत के न्यायिक निर्णयों पर परोक्ष सवाल उठा रही हैं, तो दूसरी तरफ उनके नागरिक भारतीय कानून के दायरे से बाहर जाकर विशेष सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। यह दोहरा मापदंड भारत के खिलाफ रची जा रही एक महीन साजिश की ओर स्पष्ट इशारा करता है।

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