PoK में आजादी का बिगुल: पाकिस्तान के खिलाफ भारत से मांगी मदद, क्या 1971 वाला इतिहास दोहराने की है तैयारी?
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मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों हालात विस्फोटक हो गए हैं। दशकों से पाकिस्तानी सेना और हुक्मरानों के जुल्म सह रही PoK की आवाम अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। सड़कों पर उतरकर जनता आजादी का बिगुल फूंक चुकी है, जिससे इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के मिलिट्री हेडक्वार्टर तक खौफ का साया है।

सामने आया खौफनाक सच पाकिस्तान दुनिया के सामने कश्मीर का राग अलापता है, लेकिन उसके अपने नियंत्रण वाले PoK की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। वहां की अवाम के साथ सेना की बर्बरता और बुनियादी अधिकारों को कुचले जाने की खबरें अब जगजाहिर हो चुकी हैं। मुनीर सरकार ने वहां के स्थानीय नेताओं को आतंकवादी घोषित कर अपनी बौखलाहट साबित कर दी है।

सरदार अमन खान की भावुक अपील जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने एक वीडियो जारी कर पूरी दुनिया और विशेषकर भारत के जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, राजौरी और पुंछ के लोगों से मदद की गुहार लगाई है। खान का कहना है कि राशन की किल्लत और बिजली की कटौती के जरिए अवाम को घुटनों पर लाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने 5 जुलाई को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के लिए भारत से नैतिक और जनसमर्थन की अपील की है।

पाकिस्तान की टू-नेशन थ्योरी का अंत PoK की आवाम का भारत की ओर रुख करना पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक सुसाइड जैसा है। जब PoK के मुसलमान भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था से मदद मांग रहे हैं, तो यह पाकिस्तान की उस टू-नेशन थ्योरी की कूटनीतिक मौत है, जिसके नाम पर दशकों तक देश का बँटवारा और अलगाववाद का जहर घोला गया।

क्या दोहराया जाएगा 1971 का इतिहास? पाकिस्तानी जनरलों को अब वही पुराना डर सता रहा है जिसने 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे। उन्हें डर है कि कहीं PoK का यह जन-आंदोलन पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) की तरह एक और भूगोल न बदल दे। जिस तरह से जनता अब खुलकर पाकिस्तान का हिस्सा होने से इनकार कर रही है, वह स्पष्ट संकेत है कि इस्लामाबाद की क्रूरता अब उसके अपने ही अस्तित्व के लिए खतरा बन चुकी है।

तैयार हो रहा है नया नक्शा? PoK में जारी मिलिट्री लॉकडाउन, इंटरनेट बंद करने और सामूहिक गिरफ्तारियों के बावजूद विरोध की आग थम नहीं रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अवाम का यह आक्रोश इसी तरह बना रहा, तो पाकिस्तान के नक्शे का एक और हिस्सा उससे अलग होने की दहलीज पर खड़ा है। क्या जल्द ही पाकिस्तान फिर से टुकड़े-टुकड़े होने वाला है? यह सवाल अब हर गलियारे में गूंज रहा है।

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